नागपुर हिंसा को अशोक गहलोत ने बताया 'विस्फोटक', राजस्थान के पूर्व सीएम ने सरकार से की ये अपील

Nagpur Violence Update: नागपुर हिंसा पर बयान देते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार से जाति और धर्म के आधार पर लोगों को नहीं बांटने का आग्रह किया है.

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एक दिवसीय भरतपुर दौरे पर जाते समय अशोक गहलोत ने नागपुर हिंसा पर बयान दिया है.

Rajasthan News: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने शुक्रवार को भरतपुर जाते समय नागपुर की घटना (Nagpur Violence) पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, 'मैं सत्ता में बैठे लोगों से आग्रह करता हूं कि राष्ट्रहित सबसे महत्वपूर्ण है. अगर जाति और धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश की जाएगी तो एक ना एक दिन वो विस्फोटक बन जाएगा. जो देशहित में नहीं होगा. ये पक्ष-विपक्ष की बात नहीं है. हम सभी को एक दूसरे के साथ सद्भाव से रहना चाहिए.'

17 मार्च को भड़की थी हिंसा

महाराष्ट्र के नागपुर में 17 मार्च को मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था. इसी दौरान किसी ने एक समुदाय की पवित्र पुस्तक जलाने की अफवाह फैला दी. इसके बाद दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई. जमकर पथराव हुआ और कई गाड़ियों को फूंक दिया गया. हालात काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज करके भीड़ को खदेड़ते हुए 40 से 50 लोगों को हिरासत में ले लिया. इस पथराव में डीसीपी रैंक के तीन अधिकारियों सहित कुल 33 पुलिसकर्मी घायल हुए थे. हालात काबू करने के लिए कफ्यू तक लगाना पड़ा. हिंसा के तीन दिन बाद नागपुर शहर के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू हटा लिया गया, जबकि कुछ हिस्सों में इसमें ढील दी गई.

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फहीम खान है मुख्य आरोपी

साइबर सेल के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) लोहित मतानी ने बताया, 'नागपुर में हुए दंगों के सिलसिले में चार एफआईआर दर्ज की हैं. पहली एफआईआर औरंगजेब के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के वीडियो को एडिट करके वायरल करने और हिंसा का महिमामंडन करके के बारे में है. दूसरी एफआईआर हिंसा के बारे में क्लिप बनाने और उन्हें फैलाने के बारे में है ताकि दो समुदायों के बीच हिंसा हो. तीसरी एफआईआर हिंसा को और भड़काने के लिए किए गए पोस्ट के बारे में है. जबकि चौथी एफआईआर में मुख्य आरोपी फहीम खान और पांच अन्य के खिलाफ राजद्रोह और सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है.

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पुलिस जांच में हुआ बड़ा खुलासा

पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि नागपुर में हिंसा की शुरुआत हंसापुरी के पास स्थित शिवाजी के पुतले के नजदीक मस्जिद से हुई थी. इस मस्जिद में मुस्लिम उपद्रवियों की एक बैठक हुई थी, जिसमें करीब डेढ़ से दो हजार लोग इकट्ठा हुए थे. इन लोगों ने बाद में 500 से 600 की संख्या में समूह बनाकर अलग-अलग इलाकों में हिंसा की शुरुआत की. सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक अहम सीसीटीवी फुटेज लगा है, जिसमें साफ तौर पर यह देखा जा सकता है कि किस तरह सैकड़ों लोग बाइक पर सवार होकर हंसापुरी चौक और मस्जिद के आसपास इकट्ठा हो रहे हैं. इन लोगों के पास रुमाल या गमछा था. सीसीटीवी में कई लोग मुंह पर मास्क लगाए हुए नजर आ रहे हैं, ताकि उनका चेहरा पहचान में न आए, लेकिन फिर भी कुछ आरोपियों के चेहरे साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं और कुछ गाड़ियों के नंबर प्लेट भी सीसीटीवी में कैद हुए हैं.

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