Rajasthan:शेखावाटी के मीठे लाल प्याज ने किसानों के निकाले आंसू, बंपर फसल के बावजूद मुनाफे की उम्मीदें टूटी

Rajasthan News: राजस्थान के सीकर (धोद) में प्याज उत्पादक किसान संकट में हैं. 20 हजार की लागत और 4 हजार के महंगे बीज के बावजूद मंडी में प्याज मात्र 6-7 रुपये किलो बिक रहा है. किसानों ने सरकार से निर्यात खोलने और 15 रुपये प्रति किलो भाव की मांग की है.

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NDTV

Shekhawti onion farmer upset: राजस्थान के शेखावाटी जिलों का प्याज अपनी मिठास के लिए देश और विदेशों में जाना जाता है. यह भोजन की थाली का हिस्सा बन उसकी मिठास और स्वाद को दोगुना कर देता है. सीकर जिले के धोद इलाके में इन मीठे प्याज के कारण किसानों की जेब अब भारी होती जा रही है. यहां के अधिकतर किसान आज भी प्याज की खेती पर निर्भर है. शेखावाटी क्षेत्र का यह लाल प्याज अपने मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है और इसकी विशेष मांग पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात तक रहती है.

 शेखावाटी क्षेत्र के सीकर जिले का धोद इलाका एक ऐसा क्षेत्र है जहां के अधिकतर किसान प्याज की खेती पर निर्भर है और यहां के रशीदपुरा गांव में इसकी एक बड़ी मंडी भी संचालित होती है, जहां से देश के कोने-कोने में प्याज का निर्यात किया जाता है. 

अगेती खेती से किसानों में छाई निराशा

हर साल प्याज की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान इस वर्ष मायूस है क्योंकि अबकी बार अगेती खेती ( किसी भी फसल को उसके सामान्य समय से पहले बोना) से उन्हें अच्छे मुनाफे की उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है. बल्कि इस बार इसका लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा जिसके चलते उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. प्याज की खेती पर निर्भर रहने वाले  धोद के  कंवरपुरा खाती नाडा क्षेत्र किसानों का कहना है कि प्याज की खेती अब मुनाफे की बजाय नुकसान का सौदा बनती जा रही है.

 बाजार में नहीं मिल रहे उचित दाम

किसानों का आगे कहना है कि अच्छी पैदावार के बावजूद भी बाजार में इसके उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं. प्याज की मंडियों में वर्तमान में प्याज का भाव मात्र 6 से 7 रुपए प्रति किलो चल रहा है, जिससे किसान निराश हैं और सरकार से प्याज की सरकारी खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं.

प्याज की खेती बन रही घाटे का सौदा

धोद क्षेत्र के किसान रामचंद्र ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में 6 बीघा भूमि पर मीठे लाल प्याज की बुवाई की थी, जिससे करीब 600 मण का बंपर उत्पादन तो हुआ, लेकिन मंडियों में मिल रहे कम दामों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. स्थानीय किसानों के अनुसार, प्याज की खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है. यदि सरकार प्याज का निर्यात न्यूनतम 15 रुपए प्रति किलो कर दे तो उन्हें अच्छा लाभ हो सकता है. वर्तमान भाव में लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है.

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20 हजार रुपए तक का आता है खर्च

 स्थानीय किसानों ने आगे बताया कि एक बीघा में प्याज की खेती पर करीब 20 हजार रुपए तक खर्च आ जाता है. बीज ही करीब 4 हजार रुपए प्रति किलो के हिसाब खरीद कर डाला जाता है. ऐसे में कम दाम मिलने से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. किसानों के अनुसार, पिछले साल भी प्याज के भाव संतोषजनक नहीं रहे थे और इस बार भी प्याज की मंडी में भाव काफी कम है. 

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