SMS Hospital Fire: सामने आई SMS अस्पताल अग्निकांड की जांच रिपोर्ट, चाबी ढूंढने में लगे 30 मिनट, ट्रॉमा सेंटर में जल गए 6 मरीज

Rajasthan News: सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में अक्टूबर 2025 में देर रात लगी आग की जांच रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में 5 ऐसे बड़े सनसनीखेज खुलासे हुए हैं जिन्होंने SMS ट्रॉमा सेंटर आग लगने की घटना की यादें ताजा कर दी.

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सवाई मानसिंह अस्पताल ट्रॉमा सेंटर में अग्निकांड
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SMS Hospital Fire Investigation Report: जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में अक्टूबर 2025 में देर रात लगी आग की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है. जिसमें सनसनीखेज खुलासे हुए हैं. जांच रिपोर्ट ने हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन की सेफ्टी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्योंकि रिपोर्ट से साफ हो गया है कि अगर स्टाफ ने समय रहते मुस्तैदी दिखाई होती तो 6 मरीजों की जान बचाई जा सकती थी. लेकिन स्टाफ की लापरवाही और सतर्कता की कमी के कारण 6 मरीजों के परिवारों को जिंदगी भर का दुख दे दिया गया. इस रिपोर्ट में 5 ऐसे बड़े सनसनीखेज खुलासे हुए हैं जिन्होंने अक्टूबर 2025 के SMS ट्रॉमा सेंटर आग लगने की घटना की यादें ताजा कर दी हैं.

जांच रिपोर्ट के 5 सबसे बड़े सनसनीखेज खुलासे

परिजनों की चेतावनी को अनसुना किया

रिपोर्ट के अनुसार, रात 11:35 बजे ही मरीजों के परिजनों ने स्टोर रूम में शॉर्ट सर्किट की सूचना नर्सिंग स्टाफ को दे दी थी. लेकिन ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि परिजन अपने मरीजों को बचाने के लिए बदहवास भाग रहे थे, जबकि नर्सिंगकर्मी योगेश कुमार रात 11:47 बजे वार्ड छोड़कर भागते नजर आए.

सवाई मानसिंह अस्पताल ट्रॉमा सेंटर में अग्निकांड की जांच रिपोर्ट के अंश
Photo Credit: NDTV

ताले की चाबी बनी मौत का कारण

आग स्टोर रूम में लगी थी, लेकिन वहां ताला लगा हुआ था. ताले की चाबी नर्सिंग इंचार्ज दीनदयाल अग्रवाल और सेकंड इंचार्ज कमल किशोर गुप्ता के पास थी, जिन्होंने चाबी रखने की जगह किसी को नहीं बताई थी.आधे घंटे तक कर्मचारी चाबी ढूंढते रहे, तब तक आग फॉल सीलिंग तक पहुंच गई और जहरीला धुआं पूरे आईसीयू में फैल गया.

 नियमों को ताक पर रखकर बनाया ICU

ट्रॉमा सेंटर के इस आईसीयू का डिजाइन निर्माण नॉर्म्स के अनुसार नहीं बनाया गया था. 12 बेड की योजना में बेड नंबर 12 को हटाकर वहां अवैध रूप से स्टोर रूम बना दिया गया. आईसीयू ट्रॉमा सेंटर के सेकेंड फ्लोर पर बना हुआ है. इसमें कॉटन, गॉज और स्प्रिट जैसे ज्वलनशील पदार्थ भरे थे. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस आईसीयू में एंट्री और एग्जिट के लिए केवल एक ही दरवाजा था, ऐसे में जब 5 अक्टूबर 2025 की देर रात आग लगी तो मरीजों को बाहर निकालना मुश्किल हुआ. साथ ही रेस्क्यू में भारी दिक्कत आई.

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फेल हुआ फायर सेफ्टी सिस्टम

अस्पताल में फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर तो लगे थे, लेकिन ऐन मौके पर एक भी अलार्म नहीं बजा. अंदरूनी फायर फाइटिंग सिस्टम का महीनों से निरीक्षण नहीं हुआ था. इसके लिए जिम्मेदार 'एसके इलेक्ट्रिक कंपनी' का टेंडर अब रद्द कर दिया गया है और एफआईआर के निर्देश दिए गए हैं.

सवाई मानसिंह अस्पताल ट्रॉमा सेंटर में अग्निकांड की जांच रिपोर्ट के अंश
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मरीजों को उनके हाल पर छोड़ा

सीसीटीवी फुटेज के हृदय विदारक दृश्य बताते हैं कि जब आईसीयू में आग भड़की, तो नर्सिंग स्टाफ और वार्ड बॉय मरीजों की मदद करने के बजाय भाग निकले. परिजनों को खुद अपने मरीजों को बेड सहित घसीटकर बाहर लाना पड़ा. एक मरीज की तो बेडशीट तक में आग लग चुकी थी.

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अब तक इन पर हुआ एक्शन

इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. जिसके तहत एक्सईन मुकेश सिंघल को निलंबित कर दिया गया है. इसके अलावा तत्कालीन अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी और प्रभारी डॉ. अनुराग धाकड़ को जिम्मेदारी में लापरवाही के चलते पद से हटा दिया गया है. साथ ही फायर सेफ्टी एजेंसी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसका टेंडर रद्द कर ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है.

जल्द कार्रवाई करने का दावा

वही जांच रिपोर्ट आने के बाद SMS अस्पताल के चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने बताया कि इस मामले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जल्द होने वाली है.

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