Rajasthan Politics: 'आज भी सचिन पायलट को बच्चा समझते हैं अशोक गहलोत', मदन राठौड़ बोले- बहुरूपिया शब्द नकारात्मक नहीं

राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को 'बहरूपिया' कहने, 'बाहरी' कहने और 'एक टांग पार्टी में दूसरी कहीं और होने' वाले बयानों पर अब बीजेपी ने जयपुर में सफाई दी है. जानिए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने क्या कहा?

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जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़.
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान की सियासत में इन दिनों जुबानी जंग चरम पर है. टोंक विधायक और कांग्रेस के कद्दावर नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है. भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल (Radha Mohan Das Agarwal) के 'बहरूपिया' और 'बाहरी' वाले बयान से शुरू हुआ यह विवाद अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ (Madan Rathore) तक पहुंच गया है.

"पायलट को आज भी बच्चा समझते हैं गहलोत"

मंगलवार दोपहर जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए मदन राठौड़ ने अशोक गहलोत के उस बयान पर चुटकी ली, जिसमें गहलोत ने कहा था कि पायलट के 'दोनों पैर कांग्रेस में हैं'. राठौड़ ने गहलोत के इस बयान को पायलट का अपमान बताते हुए कहा, "गहलोत आज भी पायलट को बच्चा मानते हैं, जबकि वे लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और कई बड़े पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. गहलोत के बयान से यह भाव झलकता है कि वे मानते हैं पायलट पहले गलती कर चुके हैं और अब बस टिके रहेंगे, कोई गड़बड़ नहीं करेंगे."

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'बहुरूपिया' शब्द पर मदन राठौड़ की सफाई

पायलट को 'बहुरूपिया' कहने वाले राधा मोहन दास अग्रवाल का बचाव करते हुए राठौड़ ने कहा, 'इसका अर्थ नकारात्मक नहीं है. सचिन पायलट का व्यक्तित्व सौम्य और प्रभावशाली है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे रौद्र रूप भी अपना लेते हैं. अपने पिता के साथ हुए व्यवहार के वक्त पायलट का एक अलग ही रूप सामने आया था, इसलिए उन्हें बहरूपिया कहा गया. 

पायलट को 'बाहरी' कहने पर दी ये प्रतिक्रिया

वहीं, 'बाहरी' होने के सवाल पर राठौड़ ने कहा कि राजनीति में लोग आते-जाते हैं. जो अनुभव और प्रशिक्षण लेता है, वह समय के साथ 'आंतरिक' हो जाता है.

राधा मोहन दास अग्रवाल ने कब और क्या कहा था?

इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत सोमवार (27 अप्रैल) को टोंक में हुई, जब भाजपा प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने बिना नाम लिए सचिन पायलट पर तीखा प्रहार किया. अग्रवाल ने कहा था कि टोंक का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन आज एक 'बहरूपिया' वहां का विधायक बन गया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह शख्स न तो टोंक का निवासी है और न ही राजस्थान का.

अग्रवाल ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा, 'मैं यूपी से हूं और राजस्थान का प्रभारी हूं, लेकिन सपने में भी यहां से विधायक बनने की नहीं सोचूंगा. किसी भी प्रदेश से व्यक्ति भेज दिया जाए और आप उसे माला पहना दें, यह राजस्थान की अवमानना है.' अग्रवाल ने कहा कि इस नेता की एक टांग कांग्रेस में रहती है और दूसरी पता नहीं कहां. उन्होंने दावा किया कि अगली बार टोंक से भाजपा का प्रत्याशी ही जीतेगा.

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2021 की बगावत का जिक्र

अग्रवाल की 'एक टांग' वाली टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मोर्चा संभाला. गहलोत ने स्पष्ट किया कि पायलट के दोनों पैर मजबूती से कांग्रेस पार्टी में जमे हुए हैं और वहीं रहेंगे. पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने 2021 की उस राजनीतिक बगावत (जब पायलट 18 विधायकों के साथ अलग हो गए थे) का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा, "उन्हें मानेसर कांड जैसी गलतियां करने के परिणामों का एहसास हो गया है. उन्होंने अब अपनी गलती समझ ली है और उसे सुधार लिया है. मुझे उम्मीद है कि वे फिर कभी हमें छोड़कर नहीं जाएंगे, पूरी पार्टी उनके साथ एकजुट है." गहलोत ने इस बात को दोहराया कि 2021 का वह संकट भाजपा की साजिश थी, जिसमें विधायकों का मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया था.

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने की माफी की मांग

भाजपा प्रभारी के विवादित बयानों पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कड़ी आपत्ति जताई थी. उन्होंने इसे भाजपा की 'गिरती सियासी संस्कृति' करार दिया था. उन्होंने अपनी एक्स पोस्ट में कहा था, "राजनीति में वैचारिक विरोध हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत वैमनस्य नहीं. व्यक्तिगत अपमान और मर्यादा भंग करना भाजपा की आदत बन गई है. भाजपा लगातार लोकतांत्रिक मर्यादाओं और शुचिता को खत्म कर रही है. राधा मोहन दास अग्रवाल को अपनी इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए तुरंत सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए."

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