अद्भुत है अबाबील पक्षियों की चोंच से निर्मित मिट्टी के घोंसलों का सौंदर्य, 200 साल पुराना है इतिहास

बागीदौरा कस्बे के पास नौगामा गांव में एक भवन पर अबाबील पक्षियों द्वारा घोंसले करीब 200 साल से बनाए जा रहे हैं. ये घोंसले मिट्टी के लोदों से बने हुए हैं और सैकड़ों की संख्या में हैं. ये पक्षी झुंडों में रहना पसंद करते हैं और अपने प्रजननकाल के लिए इन घोंसलों का निर्माण करते हैं.

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मकान की मुंडेर पर निर्मित अबाबील पक्षियों के घोंसले
बांसवाड़ा:

जिले के बागीदौरा कस्बे के एक मकान की मुंडेर पर निर्मित अबाबील पक्षियों का आशियाना लोगों की आकर्षण का केंद्र है. मिट्टी की लोद से निर्मित यह आशियाना अबाबील पक्षियों का आधिकारिक निवास स्थल हैं, जिसे अबाबील पक्षियों ने अपने नन्हें-नन्हें चोंच की मदद तैयार किया जाता है. नौगामा गांव में बने इस आशियाने का इतिहास 200 साल पुराना हैं.

प्रजननकाल के लिए करते हैं इन घोंसलों का निर्माण

नौगामा गांव में मिट्टी की लोदों से निर्मित अबाबील पक्षियों के घोंसलों की संख्या में सैकड़ों में हैं. पक्षियों की चोंच से निर्मित इन घोसलों का सौंदर्य इतना अनूठा है कि लोग उसकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाते हैं. गरदन के नीचे सफेद और सिर के ऊपर गहरे केसरी रंग वाले अबाबील पक्षी का मूल रंग काला होता है. ये पक्षी झुंडों में रहना पसंद करते हैं और अपने प्रजननकाल के लिए इन घोंसलों का निर्माण करते हैं.

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अबाबील को अग्रेजी में कहा जाता है 'स्वेलो'  

बर्डवॉचर कमलेश शर्मा के अनुसार यूरोप और भारत में समान रूप से पाए जाने वाले अबाबील को अंग्रेजी में स्वेलो कहा जाता है. भारत में इसकी कई प्रजातियां पाई जाती हैं. मिट्टी का घरोंदानुमा घौंसला बनाने वाली प्रजाति स्ट्रेक थ्रोटेड स्वेलो या इंडियन क्लिफ स्वेलो नाम से भी पहचानी जाती है.

200 सालों से भी पुराना है घोंसलों का इतिहास

स्थानीय जैन समाज के केसरीमल पंचोरी व कांतिलाल गांधी ने बताया कि यहां के संत भवन पर अबाबील नामक इन पक्षियों के घोंसलों का इतिहास करीब 200 साल पुराना है. ये पक्षी शाम को झुंड में घोंसलों में लौटती हैं तो आसमान इनसे ढक जाता है. ये गोलाई में तेजी से मंडराती हैं. जिले में ये घोंसले अजनास नदी पर बने पुराने पुल के अलावा कहीं नहीं मिलते हैं.

 छोटे- छोटे सुराहीनुमा घोंसलों का निर्माण

अबाबील पक्षियों के घरोंदो बेहद आकर्षक और विशिष्ट होते हैं. छोटा सा पक्षी अपने मुंह में तालाब व आस-पास से अपनी चोंच में मिट्टी के लोंदों को लाकर कलात्मक रूप से घोंसलों का निर्माण करता है. झुंड में रहना पसंद करने वाले ये पक्षी गीली मिट्टी के लोंदों से एक साथ 500 से अधिक छोटे- छोटे सुराहीनुमा घोंसलों का निर्माण करते हैं.

उड़ते-उड़ते ही भोजन का शिकार करते हैं

इस घरोंदे के भीतर वे अपने परों का नरम स्तर भी लगाते हैं. इन घोंसलों को नर और मादा मिलकर अपने प्रजननकाल के लिए बनाते हैं. इनका मुख्य भोजन हवा में उड़ने वाले छोटे-छोटे कीट हैं और ये उड़ते-उड़ते ही उनका शिकार करते हैं.

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