जयपुर-बूंदी तीज की रोचक कहानी, जयपुर की तीज लूट ले आए थे बूंदी के राजा

तीज पर सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर लम्बी उम्र की कामना करती हैं. तीज पर जयपुर और बूंदी दोनों जगहों पर तीज माता की सवारी निकाली जाती है. बूंदी में तीज मनाए जाने के पीछे की कहानी बड़ी रोचक है.

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देवी पार्वती की पूजा करतीं महिलाएं
Bundi:

राजस्थान अपने इतिहास के साथ-साथ तीज-त्योहारों के लिए भी मशहूर है. यहां हर दिन खास होता है. आज 19 अगस्त का दिन भी बेहद खास है. आज पारंपरिक उत्साह के साथ महिलाएं हरियाली तीज मना रही हैं. इन दिन सुहागन महिलाएं व्रत रखकर पति के लंबी उम्र की कामना करती हैं. हरियाली तीज पर जयपुर और बूंदी दोनों जगहों पर तीज माता की सवारी निकाली जाती है.लेकिन क्या आपको पता है कि जयपुर की तीज को बूंदी के राजा लूट कर लेकर आए थे.

जी हां, बूंदी में तीज मेला के पीछे एक रोचक कहानी है. कहा जाता है कि रियासत में बूंदी का गोठडा के दरबार बलवंत सिंह कजली तीज को लूट कर लाये थे. एक बार राजे के मित्र के कहने पर जयपुर में तीज की भव्य सवारी निकालने की बात हुई थी. साथ ही कहा गया था कि क्यों न बूंदी में भी ऐसा कुछ आयोजन हो. यह बात राजा बलवंत सिंह को रास आ गई और जयपुर की उसी तीज को लाने का मन बना लिया.

जब जयपुर से तीज की सवारी निकल रही थी तब बलवंत सिंह ने आक्रमण कर तीज को लूट लिया और बूंदी लेकर आ गए और 15 दिन बाद बूंदी में तीज को राजशाही ठाठ से निकाले जाने लगा. तब से बूंदी में कई सालों से कजली तीज का त्योहार मनाया जा रहा है और आज दिन तक वही शानो-शौकत क़ायम है.

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कहा जाता है कि उस समय जयपुर के आमेर के किले में जो तीज की सवारी निकाली जाती थी, वह प्रतिमा सोने की थी. उसे ही लूट कर राजा बूंदी लाए थे. उसके बाद जयपुर में तीज माता की बहरूपी सवारी निकाली जाने लगी। लोग कहने लगे कि बूंदी में असली और जयपुर में नकली की सवारी निकलती हैं. पहले राज दरबार बूंदी तीज की सवारी से निकलते थे बाद में लोकतंत्र स्थापित होने पर स्थानीय नगर निकाय इस आयोजन को करने लगे.

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अब तीज सवारी निकलने के साथ-साथ 15 दिवसीय मेला भी बूंदी में लगता है, जिसमें देश-प्रदेश से कारोबारी और कारीगर अपनी-अपनी दुकानें लगाने के लिए बूंदी आते हैं. इस बार भी यह मेला लगेगा, नगर परिषद के सभापति ने कहा कि मेले को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही है. सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर विभिन्न कलाकारों से बात की जा रही है. 2 सितंबर को मेले का विधिवत शुभारंभ होगा. जहां कई नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे.

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पति की लंबी उम्र के लिए सुहागन महिलाएं रखती हैं व्रत

राजस्थान में इस वर्ष हरियाली तीज 19 अगस्त को मनाई जाएगी जिसको लेकर महिलाओं ने अभी सही तैयारियां शुरू कर दी है. महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए तीज माता की पूजा करती हैं. इस त्योहार पर देर रात्रि से ही महिलाएं मंगल गीत गाते हुए अपने हाथों में मेहंदी रचाती हैं. इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कजली तीज के रूप में की जाती है. बूंदी में तीज पर विशेष तोर पर घेवर बनाया जाता है।

राज परिवार के पूर्व सदस्य बलभद्र सिंह ने बताया कि जयपुर की तीज को बूंदी लूटकर राजा बलवंत सिंह लाए थे. तब से तीज का विशेष महत्व है और इस संस्कृति को राजपरिवार आज दिन तक भी ज़िन्दा रखे है. लोगों को इस संस्कृति से रूबरू करवाने के लिए शाही ठाठ से सवारी को राज परिवार निकालता है. ठीक इसके 15 दिन बाद नगर परिषद निकालती है. रानी रोहणी ने बताया कि इस दिन महिला सज-धजकर विशेष शृंगार करती हैं और व्रत रखकर माता पार्वती के रूप में तीज माता की पूजा करती है.

मां पार्वती से जुड़ी है कथा, निस्वार्थ प्रेम के सम्मान का प्रतीक 

चारभुजा नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष पुरषोत्तम पारीक ने बताया कि यह कड़ी गर्मी के बाद मानसून के स्वागत का उत्सव भी है. कजली तीज पूरे साल मनाए जाने वाले तीन तीज त्योहारों में से एक है. आखातीज और हरियाली तीज की तरह ही कजली तीज के लिए विशेष तैयारी की जाती है. इसी दिन देवी पार्वती की पूजा की जाती है. 108 जन्म लेने के बाद देवी पार्वती भगवान शिव से शादी करने में सफल हुईं. इस दिन को निस्वार्थ प्रेम के सम्मान के रूप में मनाया जाता है. यह निस्वार्थं भक्ति थी जिसने भगवान शिव को अंततः देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. इसलिए महिलाएं इस दिन को खास मानते हुए व्रत रखती है और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है.

भव्य सवारी निकलती है, 15 दिन मेले के साथ होते है सांस्कृतिक आयोजन

समाजसेवी बिट्ठल कुमार ने बताया कि अब दो दिन तीज सवारी निकालने का दायित्व नगरपरिषद उठा रखा है. राजघराने द्वारा तीज की प्रतिमा नगर परिषद को नहीं मिली तो दूसरी प्रतिमा बनवाई. 2 दिनों तक सवारी निकलने के बाद यहां शहर के कुम्भा स्टेडियम में 15 दिवसीय मेला भरता है. जहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हाड़ौती सहित राजस्थान के लोग मेले में देखने उमड़ते है. सवारी में जागीरदार, ठाकुर, धनिक वर्ग परंपरागत पोशाक में पूरी शानो-शौकत के साथ भाग लेते हैं। सैनिक शौर्य का प्रदर्शन करते लहरिया ओढ़े सजी-धजी सुहागिनें तीज महोत्सव में चार चांद लग जाते थे. दो दिनों तक तीज सवारी में जन मनोरंजन कार्यक्रम होते थे, जिनमें दो मदमस्त हाथियों का युद्ध भी होता. देखने वालों की भीड़ उमड़ जाती है. 

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