राजस्थान में आबादी घटाने के लिए बना था चुनाव में 2 बच्चों की सीमा वाला नियम, क्या है अभी जनसंख्या का हाल?

राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के लिए 30 साल पहले लाया गया नियम हटाने का फैसला किया गया है.

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राजस्थान की आबादी आखिरी 2011 की जनगणना में 68,548,437 थी
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राजस्थान सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्थानीय चुनावों में चुनाव लड़ने के लिए 2 बच्चों की सीमा वाले नियम को ख़त्म करने का फ़ैसला किया है. इस नियम के तहत 2 से ज़्यादा बच्चों वाले लोग पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव नहीं लड़ सकते थे. कल, 25 फरवरी को भजनलाल शर्मा सरकार ने कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगा दी. राजस्थान के कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने मंत्रिमंडल में लिए गए निर्णय की घोषणा करते हुए जानकारी दी कि इस नियम को निरस्त करने के लिए दो विधेयक लाए जाएंगे जिन्हें विधानसभा के मौजूदा सत्र में ही पारित कर दिया जाएगा. पटेल ने बताया कि कैबिनेट ने राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 और राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है. उन्होंने यह भी बताया कि यह नियम जिस समय लाया गया था तब परिस्थितियां कुछ और थीं और अब हालात बदल गए हैं.

पहले क्या थीं परिस्थितियां, क्यों बना क़ानून ?

भारत में स्वतंत्रता के बाद स्थानीय स्वशासन तथा सत्ता के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य से एक कानून बनाया गया. संविधान के अनुच्छेद 40 के तहत 1953 में पंचायती राज अधिनियम लागू हुआ और इसके तहत स्थानीय चुनाव आयोजित होने लगे. लेकिन, फिर भारत में जनसंख्या बढ़ने लगी और इसके दबाव की वजह से विकास बाधित होने लगा. तब जाकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया.

वर्ष1994 में संविधान में संशोधन कर संविधान में आर्टिकल या अनुच्छेद 243 जोड़ा गया. इसी के तहत संशोधन हुए और 1995 में राजस्थान में पंचायती राज एक्ट लागू हो गया. इसी में पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव में दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान था. उस समय राजस्थान में बीजेपी की सरकार थी और भैरों सिंह शेखावत तब मुख्यमंत्री थे.

राजस्थान की जनसंख्या तब क्या थी और अब क्या है?

जिस वक्त राजस्थान में यह नियम आया उस समय प्रदेश की जनसंख्या लगभग साढ़े 4 करोड़ थी. वर्ष 1991 की जनगणना में राजस्थान की कुल आबादी 43,880,640 थी. वर्ष 2001 में राजस्थान की आबादी 56,507,188 हो गई. इसके बाद आखिरी जनगणना में 2011 में राज्य की आबादी बढ़कर 68,548,437 हो गई.

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आबादी बढ़ी लेकिन फिर रोक क्यों हटी?

एक निगाह में से ऐसा लग सकता है कि राजस्थान में जनसंख्या 1991 के बाद से बढ़ी ही है. लेकिन, जनसंख्या के नियंत्रण का पैमाना एक दूसरे दर से तय होता है जिसे कुल प्रजनन दर (TFR or Total Fertility Rate) कहा जाता है. आसान भाषा में कहा जाए तो TFR यह दर्शाता है कि एक महिला ने अपने जीवनकाल में कितने बच्चों को जन्म दिया है या दे सकती है.

गणना के आधार पर यह माना जाता है कि अगर TFR 2.1 से नीचे रहता है तो इसका मतलब होता है कि आबादी घट रही है. इसलिए इसे प्रतिस्थापन या (Replacement Rate or RR) भी कहा जाता है. यानी वह दर जिससे गणना की जाती है कि लोग अपनी पीढ़ी को प्रतिस्थापित करने के लिए उतनी ही संख्या में संतानों को पैदा कर रही है या नहीं? ऐसा नहीं होने पर जनसंख्या असंतुलन की स्थिति आ सकती है जहां वृद्ध आबादी की संख्या बढ़ जाएगी.

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भारत का कुल प्रजनन दर (TFR) वर्ष 1971 में 5.2 था जो घटकर 1981 में 4.5 पर, और 1991 में 3.6 पर आ गया था.

"राजस्थान की जनसंख्या का अनुपात पहले 3.2 से अधिक था जो अब घटकर मात्र 2 रह गया है. इसलिए यह समझा गया कि इस प्रावधान की जरूरत नहीं है." - जोगाराम पटेल, कानून मंत्री, राजस्थान

राजस्थान में इसलिए हुआ रोक हटाने का फैसला

राजस्थान सरकार ने 2 बच्चों के नियम को हटाने का फैसला इसी वजह से किया. जिस समय भारत में पंचायती राज एक्ट में संशोधन किया गया उस समय राजस्थान का TFR 3.2 था. लेकिन अब यह घटकर 2 पर आ गया है जो प्रतिस्थापन दर से कम है.

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जोगाराम पटेल ने कहा,"उस समय भारत में जनसंख्या विस्फोट की स्थिति थी. तब जनसंख्या का अनुपात 3.2 था. तब हमारा आर्थिक तंत्र मजबूत नहीं था और सरकारी योजनाओं का लाभ सबको नहीं मिल पा रहा था. इसलिए संशोधन किया गया कि 2 से अधिक संतानों वाला व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता. लेकिन अब परिस्थितियां बिलकुल बदल गई हैं.

जोगाराम पटेल ने कहा,"राजस्थान की जनसंख्या का अनुपात पहले 3.2 से अधिक था जो अब घटकर मात्र 2 रह गया है. ऐसी परिस्थिति में विशेषज्ञों की भी राय थी और आम जनों की भी इच्छा थी कि योग्य उम्मीदवारों को अपनी उम्मीदवारी से वंचित करना ठीक नहीं है. इसलिए यह समझा गया कि इस प्रावधान की जरूरत नहीं है."

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देखिए मंत्री जोगाराम पटेल का इंटरव्यू - Video