Rajasthan Politics: 'साढ़ू दो तरह के होते हैं, यह दूसरे वाले हैं', किरोड़ी लाल मीणा पर गोविंद सिंह डोटासरा ने कसा तंज

Congress Meeting Today: दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आज बड़ी बैठक होने वाली है. इसी में शामिल होने के लिए गोविंद सिंह डोटासरा जयपुर से रवाना हुए थे. इसी दौरान दौसा में उन्होंने यह बयान दिया.

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दिल्ली जाते समय गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने 'साढ़ू' को लेकर बड़ा बयान दिया है.

Rajasthan News: राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) ने गुरुवार सुबह जयपुर से दिल्ली जाते समय दौसा (Dausa) में रुककर मीडिया से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) को लेकर पूछे गए एक सवाल पर जवाब देते हुए कहा, 'साढ़ू दो तरह के होते हैं. वे दूसरे वाले हैं.' यह जवाब सुनकर उनके आसपास खड़े कांग्रेस समर्थक भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए.

गोविंद सिंह डोटासरा ने 15 सितंबर 2024 को पहली बार किरोड़ी लाल मीणा को अपना साढ़ू बताया था. उन्होंने कहा था कि वे दोनों मिलकर राजस्थान में पर्ची सरकार का तख्तापलट करना चाहते हैं.

सक्रिय राजनीति में किरोड़ी की वापसी

डोटासरा का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में किरोड़ी लाल मीणा के बैकफुट पर आने की चर्चाएं चल रही हैं. 25 मार्च को बीकानेर दौरे के दौरान किरोड़ी लाल मीणा ने बयान दिया था कि वे सक्रिय राजनीति में फिर से वापसी कर रहे हैं. इसके बाद कोटा में उन्होंने कहा कि वे अब पूरी तरह सरकार के साथ हैं और बतौर कृषि मंत्री ऐसा काम करेंगे जो पिछले 10 सालों में नहीं हुआ. इस बयान के वायरल होने के बाद से ही सवाल उठ रहा है कि है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो मीणा ने अपना 'बागी' रुख बदल लिया?

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अपनी ही सरकार को कई बार घेर चुके हैं मीणा

दरअसल, कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कई बार अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है. उन्होंने अलग-अलग मौकों पर अपनी ही पार्टी के नेताओं और नीतियों पर सवाल उठाए हैं. लोकसभा चुनाव में 11 सीटों पर बीजेपी की हार के बाद भी मीणा आक्रामक हो गए थे. जनवरी में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि दौसा सीट पर उनके भाई को हराने के लिए ‘अभिमन्यु को घेरकर मारने' जैसी साजिश की गई. लेकिन सबसे बड़ा विवाद तब हुआ जब मीणा ने विधानसभा सत्र में अपनी ही सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लगाए.

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'अब पुरानी बातें मत कुरेदो, वो बीत गईं'

मीणा के इस बयान के बाद पार्टी को उनका रवैया पसंद नहीं आया. भाजपा नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता माना और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया. हालांकि, मीणा ने खुद को अनुशासित सिपाही बताते हुए नोटिस का जवाब दे दिया, लेकिन उनकी बयानबाजी जारी रही. 30 मार्च को सवाई माधोपुर में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हराने की पूरी साजिश हुई थी. उन्होंने पर्ची सरकार का मुद्दा भी उठाया. लेकिन अब जब वो कोटा पहुंचे, तो उनके बयान में अचानक बदलाव दिखा. कोटा में मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा कि अब पुरानी बातें मत कुरेदो, वो बीत गईं. मुझे हाईकमान से निर्देश मिला है कि काम करो, और मैं अब पूरी ताकत से कृषि मंत्री के रूप में काम करूंगा.

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किरोड़ी लाल मीणा के यूटर्न की वजह क्या है?

सियासी जानकारों के मुताबिक, इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं. कहा जा रहा है कि भाजपा का अनुशासन किसी भी मंत्री को बगावती तेवर अपनाने की इजाजत नहीं देता. मीणा को साफ संकेत दिया गया कि अगर वे इसी राह पर चलते रहे, तो उनका मंत्री पद भी खतरे में पड़ सकता है. खबरें हैं कि हाल ही में उनके कुछ बयानों को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनसे सख्ती से बात की और स्पष्ट कर दिया कि उनके बयानों से सरकार की छवि खराब हो रही है. मीणा को दो टूक कह दिया गया कि या तो वे बयानबाजी बंद करें या फिर अपने भविष्य की चिंता करें. यही कारण है कि मीणा को अपना सियासी भविष्य भी संकट में लगने लगा है. वे खुद कह चुके हैं कि जब-जब सवाई माधोपुर से जीते, तभी मंत्री बने. अगर वे पार्टी नेतृत्व से टकराव जारी रखते, तो उनकी कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती थी. कहा ये भी जा रहा है कि किरोड़ी लाल मीणा का यह कदम पूरी तरह से एक रणनीतिक बदलाव है. उन्होंने महसूस किया कि अगर वे सरकार के खिलाफ खुलकर खड़े रहेंगे, तो पार्टी में उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है. इसलिए उन्होंने बैकफुट लिया और अब सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं.

'कांग्रेस की विचारधारा का मुकाबला नहीं'

वक्फ संसोधन बिल पर डोटासरा ने कहा, 'इन्हें केवल हिंदू-मुस्लिम करना है. आरएसएस का यह एजेंडा है और इनको लागू करना है. जो देश के जरूरी मुद्दे हैं उन पर बात नहीं हो रही है. एक तरफ पीएम मोदी ईद पर मुफ्त किट बांट रहे हैं, दूसरी तरफ इस तरह के बिल ला रहे हैं जिसकी 70 साल से किसी सरकार को जरूरत नहीं पड़ी. 70 सालों में कांग्रेस ने 50 साल धर्मनिरपेक्षता से राज किया है. कांग्रेस की जो विचारधारा का मुकाबला भाजपा और आरएसएस की विचारधारा नहीं कर सकती.

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