टीकाराम जूली का आरोप, सरकार सदन में तथ्य छिपाकर कर रही गुमराह... पेश कर रही भ्रामक आंकड़े

विश्वविद्यालयों में वसूले जा रहे 1000 रुपये प्रति छात्र ‘विमर्श शुल्क’ को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस मद में लगभग 225 करोड़ रुपये एकत्रित किए गए, लेकिन सरकार यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि यह विमर्श क्या है

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
टीकाराम जूली

Rajasthan Assembly Session: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बुधवार को राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सदन में तथ्यों को छिपाकर विधानसभा को गुमराह कर रही है. विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सवा दो वर्षों के कार्यकाल के बावजूद सरकार सुधार के बजाय विसंगतियों को बढ़ावा दे रही है.टीकाराम जूली ने जनजातीय विकास विभाग में टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार करने का आरोप लगाया. 

उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो साल से नियमित टेंडर प्रक्रिया बंद है और बजट सीधे हॉस्टल वार्डनों के खातों में डाला जा रहा है. उन्होंने एक ही वस्तु घी की खरीद में भारी मूल्य अंतर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कहीं 400 रुपये तो कहीं 800 रुपये प्रति लीटर तक भुगतान किया गया. उन्होंने इसे आदिवासी बच्चों के अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया और कहा कि संबंधित मंत्री सदन में स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए.

छात्र से 1000 रुपये शुल्क लेकर 225 करोड़ बनाए

विश्वविद्यालयों में वसूले जा रहे 1000 रुपये प्रति छात्र ‘विमर्श शुल्क' को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस मद में लगभग 225 करोड़ रुपये एकत्रित किए गए, लेकिन सरकार यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि यह विमर्श क्या है और कहां आयोजित हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि सदन को अलग अलग समयावधि के भ्रामक आंकड़े देकर गुमराह करने का प्रयास किया गया.

पुराने कार्यों को नया बताकर पेश किया

जल जीवन मिशन को लेकर उन्होंने कहा कि कोटपूतली और गंगानगर से जुड़े सवालों पर मंत्रियों के पास कोई ठोस जवाब नहीं था. वर्ष 2024-25 में एक भी नई स्वीकृति नहीं होने के बावजूद पुराने कार्यों को नया बताकर पेश किया जा रहा है. यूडीएच विभाग में भर्तियों और कथित विसंगतियों पर भी सरकार ने गोलमोल जवाब दिया.

Advertisement

सदन में बजट की तुलना बेटा बेटी से किए जाने वाली टिप्पणी पर भी टीकाराम जूली ने कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि जिस सदन में समानता और महिला अधिकारों से जुड़े कानून बनते हैं, वहां इस प्रकार की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया, जबकि सत्ता पक्ष की मानसिकता अब भी भेदभावपूर्ण नजर आती है.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के हर प्रयास के खिलाफ कांग्रेस सड़क से सदन तक आवाज उठाती रहेगी. उन्होंने कहा कि जनता सरकार की कार्यशैली को देख रही है और समय आने पर जवाब देगी.

Advertisement

यह भी पढ़ेंः "डॉक्टरों से 50 लाख का 5 साल का बॉण्ड भरवाएं", स्वास्थ्य व्यवस्था पर बीजेपी विधायकों ने की भजनलाल सरकार से बड़ी मांग