जैसलमेर में गूंजी 2 नन्हें गोडावण की किलकारी, एक चूजे का प्राकृतिक तो दूसरे का कृत्रिम गर्भाधान से हुआ जन्म

गोडावण जैसे संवेदनशील और दुर्लभ पक्षी के मामले में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक की सफलता को बेहद महत्वपूर्ण भी माना जा रहा है.

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Jaisalmer news: जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर में दो नन्हे गोडावणों ने जन्म लिया. सम और सुदासरी स्थित ब्रीडिंग सेंटरों में चूजों का जन्म हुआ. ब्रिडिंग सेंटर में गोडावणों का कुनबा बढ़कर 70 तक पहुंचा. एक चूजे का जन्म प्राकृतिक तरीके से प्रजनन हुआ. जबकि दूसरा चूजा कृत्रिम गर्भाधान तकनीक की देन है. इसे गोडावण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कामयाबी माना जा रहा है. 

दुनिया के दुर्लभ पक्षियों में शामिल है गोडावण

गोडावण राजस्थान के राज्य पक्षी और दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल है. चूजों के जन्म को गोडावण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है. साथ ही गोडावण जैसे संवेदनशील और दुर्लभ पक्षी के मामले में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक की सफलता को बेहद महत्वपूर्ण भी माना जा रहा है.

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केंद्रीय मंत्री ने वन विभाग को दी बधाई

इस सफलता पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने खुशी जाहिर करते हुए राजस्थान वन विभाग की टीम को बधाई दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण-संवेदनशील नेतृत्व में देश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है. 

जल्द शुरू होगी सॉफ्ट रिलीज की प्रक्रिया

गोडावण संरक्षण परियोजना अब अपने चौथे और सबसे चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है. वन विभाग जल्द ही सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है. इसके तहत ब्रीडिंग सेंटर में पले चुनिंदा गोडावणों को पहले बड़े सुरक्षित बाड़ों में रखा जाएगा, जहां उन्हें प्राकृतिक वातावरण में भोजन तलाशने और शिकारियों से बचने का अभ्यास कराया जाएगा. इसके बाद उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा.

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