Rajasthan Election 2023: ताजपोशी की कामना लेकर 'सत्ता की देवी' के मंदिर पहुंचींं वसुंधरा राजे, की पूजा अर्चना

बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से 14 किमी की दूरी पर स्थित, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर सदियों पुराना बताया जाता है. कहा जाता है कि पहले मंदिर के चारों ओर शक्तिपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी नामक तीन किले हुआ करते थे और किलों के मध्य में स्थित होने के कारण देवी भगवती का नाम त्रिपुर सुंदरी पड़ा.

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वसुंधरा राजे.
Facebook@Vasundhara Raje

Rajasthan Assembly Election 2023: चुनाव के समर में विजयश्री प्राप्त करने के लिए बांसवाड़ा जिले का त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (Shree Tripur Mata Bala Sundari Mandir) दैवीय चाहने वाले राजनेताओं का पसंदीदा मंदिर बन जाता है. कामोबेश इसी कामना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने शुक्रवार को सत्ता देने वाली मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में पूजा अर्चना की. मां त्रिपुरा सुंदरी के बारे में कहा जाता है कि मां सत्ता या "साम्राज्य" (साम्राज्य) चाहने वाले श्रद्धालुओं की कामना पूरी करती है.

गहलोत-पूनिया भी कर चुके हैं दर्शन

पंडित निकुंज मोहन पंड्या ने पूजा अर्चना कराई और बताया, 'मां त्रिपुरा सुंदरी 'साम्राज्य' चाहने वाले भक्तों को आशीर्वाद देती है, जिसके चलते  विधानसभा चुनाव में विजयश्री को लेकर इन दिनों श्रद्धालु नेताओं की यात्राएं बढ़ गई हैं.' आपको बता दें कि राजस्थान की सभी 200 विधानसभा सीटों पर 25 नवंबर को मतदान होगा और 3 दिसंबर को मतगणना होगी. इससे पूर्व अब तक कई नेता और केंद्रीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक "साम्राज्य' और राजनीति में सफलता की कामना करने वाले लोग मंदिर में आकर दर्शन कर चुके हैं. पंडित निकुंज मोहन पंड्या ने कहा कि तत्कालीन राजा और शासक हर महत्वपूर्ण युद्ध से पहले मां त्रिपुरा सुंदरी से प्रार्थना और पूजा अर्चना करने के बाद ही रण भूमि में जाते थे. इस वर्ष मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया और राज्य के कई मंत्री भी मंदिर में पूजा अर्चना कर चुके हैं.

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गर्भगृह में माता की भव्य मूर्ति

त्रिपुर सुंदरी मंदिर में राजनेताओं के अलावा बड़ी संख्या में उद्योगपतियों सहित अन्य श्रद्धालु भी मंदिर में पूजा-अर्चना करने आते हैं. बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से 14 किमी की दूरी पर स्थित, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर सदियों पुराना बताया जाता है. कहा जाता है कि पहले मंदिर के चारों ओर शक्तिपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी नामक तीन किले हुआ करते थे और किलों के मध्य में स्थित होने के कारण देवी भगवती का नाम त्रिपुर सुंदरी पड़ा. गर्भगृह में देवी की काले रंग की भव्य और आकर्षक मूर्ति है, जिसमें अठारह भुजाएं हैं, प्रत्येक में अलग-अलग हथियार हैं. अन्य छोटी मूर्तियां, जिन्हें दास महाविद्या कहा जाता है, भी मौजूद हैं. मूर्ति के निचले भाग में श्री यंत्र उत्कीर्ण है, जिसका अपना विशेष तांत्रिक महत्व है. 

दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं श्रद्धालु

सदियों से, मंदिर 'शक्ति' साधकों के लिए एक प्रसिद्ध पूजा केंद्र रहा है. दूर-दूर से लोग आते हैं और इस शक्तिपीठ पर सिर झुकाते हैं. नवरात्रि उत्सव के दौरान, मंदिर के प्रांगण में हर दिन विशेष कार्यक्रम होते हैं. पुजारी गणेश शर्मा ने कहा, जगत जननी त्रिपुर सुंदरी शक्तिपीठ के कारण यह स्थान जीवंत, ऊर्जावान और शक्तिशाली है. मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष कांति लाल और महासचिव नटवर लाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में काफी विकास कार्य हुए हैं. उन्होंने बताया कि मंदिर में पूरे राजस्थान और मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से लोग आते हैं.