फिल्ममेकर विक्रम भट्ट की पत्नी को SC से मिली अंतरिम जमानत, डायरेक्टर की अर्जी पर अगले हफ्ते सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा आईवीएफ की मालिक द्वारा दायर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी को अंतरिम जमानत दे दी है. पूरी कहानी यहां पढ़ें.

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विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी को सुप्रीम कोर्ट से दी अंतरिम जमानत.
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के बहुचर्चित ₹30 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा फैसला आया है. कोर्ट ने फिल्ममेकर विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को तो अंतरिम जमानत दे दी है, लेकिन खुद विक्रम भट्ट को फिलहाल राहत नहीं मिली है. चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की बेंच ने विक्रम भट्ट की याचिका पर सुनवाई के लिए अब 20 फरवरी (अगले शुक्रवार) की तारीख तय की है.

पहले HC ने किया था इनकार

चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को यह आदेश सुनाया है. इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद उदयपुर के मशहूर इंदिरा आईवीएफ के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया की एक शिकायत से शुरू हुआ था. आरोप है कि विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी ने डॉ. मुर्डिया को फिल्म प्रोजेक्ट्स में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच दिया था. आरोप है कि फिल्म बनाने के नाम पर करीब 30 करोड़ रुपये लिए गए, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ. जांच में सामने आया कि भट्ट दंपति ने कथित तौर पर फर्जी बिल तैयार किए और पैसे अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर लिए. 'महाराणा-रण' और 'विश्व विराट' जैसी फिल्मों के नाम पर पैसे लिए गए, लेकिन शूटिंग तक शुरू नहीं हुई.

नवंबर 2025 में दर्ज FIR के मुताबिक, यह मामला केवल कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन का नहीं बल्कि सोची-समझी धोखाधड़ी का है.

मुंबई से हुई थी गिरफ्तारी

दिसंबर 2025 में राजस्थान पुलिस ने मुंबई में छापेमारी कर विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी, मैनेजर महबूब अंसारी और उदयपुर के दिनेश कटारिया को गिरफ्तार किया था. तब से वे हिरासत में थे. विक्रम भट्ट के वकील का तर्क था कि यह मामला 'सिविल नेचर' का है और पुलिस ने केवल FIR के आधार पर कार्रवाई की है, जबकि सभी भुगतान आपसी सहमति से हुए थे.

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हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

जोधपुर स्थित राजस्थान हाई कोर्ट ने 31 जनवरी को जमानत देने से इनकार कर दिया था. जस्टिस विनोद कुमार भरवानी ने कहा था कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपियों को बाहर छोड़ने से गवाहों पर दबाव पड़ सकता है. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद विक्रम भट्ट की पत्नी को अस्थाई तौर पर राहत मिल गई है.

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