विश्वेंद्रसिंह का एलान, '13 फरवरी को मोती महल पर रियासतकालीन झंडा फहराऊंगा, हिम्मत है तो रोकना मुझे' 

पिछले साल 22 सितंबर को एक युवक ने झंडा हटा दिया गया था. तब से लेकर अब तक मोती महल पर कोई भी झंडा नहीं लगा है. भरतपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह का पत्नी दिव्या सिंह और बेटे अनिरुद्ध सिंह से लंबे समय से विवाद चल रहा है.

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भरतपुर के मोतीमहल का विवाद काफी दिनों से चला रहा हैं.

Bharatpur News: भरतपुर के पूर्व राजपरिवार में मोतीमहल पर रियासतकालीन झंडा लगाने को लेकर विवाद थम नहीं रहा है. पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसमें लिखा है, ''13 फरवरी को महाराजा सूरजमल की जयंती के दिन मैं खुद झंडा लगाऊंगा. किसी में हिम्मत है तो रोक कर दिखा देना मुझे. भरतपुर राजपरिवार में पिछले 5 सालों से चला आ रहा पारिवारिक विवाद सुलझने के कगार पर ही था कि मेरी पत्नी व बेटे ने भरतपुर का रियासतकालीन झंडा अभी तक नहीं लगाने के कारण यह विवाद फिर से उलझ गया है.''

क्या पूरा मामला ? 

बता दें, इससे पहले मोती महल पर रियासतकालीन झंडे की जगह युद्ध भूमि का झंडा लगाया गया था, जिस पर सर्व समाज ने कड़ी आपत्ति जताई थी. इसको लेकर 2025 सितंबर माह में जिले के अलग-अलग इलाकों में पंचायतें हुई थीं. पंचायतों में यह निर्णय लिया गया था कि 21 सितंबर 2025 को मोती महल से युद्ध भूमि का झंडा हटाकर रियासतकालीन झंडा लगाया जाएगा.

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परिवार में ही है विवाद  

पिछले साल 22 सितंबर को एक युवक ने झंडा हटा दिया गया था. तब से लेकर अब तक मोती महल पर कोई भी झंडा नहीं लगा है. भरतपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह का पत्नी दिव्या सिंह और बेटे अनिरुद्ध सिंह से लंबे समय से विवाद चल रहा है. विवाद की जड़ राजघराने की करोड़ों की प्रॉपर्टी, बेशकीमती स्वर्ण-आभूषण और एंटीक आइटम का शाही भंडार है.

विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा ?

विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा है ''या तो मेरी पत्नी व बेटा भरतपुर रियायत के झंडे को फिर से लगा दें नहीं तो मैं स्वयं 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल जी के जन्मदिवस के अवसर पर खुद मोती महल जाके रियासत कालीन झंडा लगाऊंगा. हालांकि, रियासत कालीन झंडे की रस्सी व तार काट दिया गया है, मैं तब भी झंडे को फहरा के आऊंगा किसी में हिम्मत है तो रोक के दिखा देना मुझे.''

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