भीलवाड़ा से 35 किलोमीटर दूर बनेड़ा ब्लॉक के जसवंतपुरा गांव का प्राचीन घाट तालाब जहरीला हो गया है. तालाब में मछलियां और पानी पीने के बाद पशुओं की मौत से गांव में हड़कंप मचा हुआ है. पशुओं की मौत के बाद प्रशासन चेता और तालाब की जिला मुख्यालय पर स्थित जलदाय विभाग (PHED) की लैब में जांच कराई. जांच रिपोर्ट में तालाब का पानी उपयोग करने लायक नहीं बताया गया. पानी जहरीला बताया.
गांव में सर्वे शुरू
प्रशासन ने आनन-फानन में तालाब पर चेतावनी बोर्ड लगा दिया. मेडिकल टीम से गांव में सर्वे शुरू कराया गया. गांव में घर-घर जाकर एएनएम और महिला बाल विकास विभाग की आशा सहयोगिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सर्वे कर रही हैं. ग्रामीणों की एक टीम प्राचीन घाट पूजन वाले तालाब पर पहरा दे रही है, जहां आदमियों के साथ-साथ पालतू पशुओं को भी आने से रोका जा रहा है.
चेतावनी बोर्ड लगाया
जसवंतपुरा गांव की जीवन रेखा जसवंतपुरा घाट तालाब के प्रदूषित करने और केमिकल डालने से पानी जहरीला होने की आशंका जताई जा रही है. प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर उपखंड अधिकारी बनेड़ा का तालाब का पानी प्रयोग नहीं करने का चेतावनी का लेटर तालाब पर चस्पा किया है.
तालाब की मछलियां मर रही थीं
चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग के उप-स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत एएनएम मला मीणा का कहना है कि गांव में पिछले दिनों जसवंतपुरा तालाब में मछलियां मर रही थीं. इसकी जानकारी हमने अधिकारियों को दी, और गांव के तालाब और पेज स्रोतों के पानी के नमूने लिए. पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच रिपोर्ट में पानी पीने योग्य नहीं मिला. जहरीला बताया गया.
ओरआरएस का घोल दे रहे
अधिकारियों के निर्देश पर घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं. लोगों को ओआरएस का घोल दे रहे हैं. कोई बीमार तो नहीं है? इसका पता लग रहे हैं. जिंक की टेबलेट के साथ-साथ क्लोरीन की टेबलेट दे रहे हैं. ओआरएस का घोल भी लोगों तक पहुंचा रहे हैं. घर-घर जाकर लोगों को समझा रहे हैं कि तालाब का पानी प्रयोग में नहीं लेना है. तालाब से सटे एक हैंडपंप के भी पानी के प्रयोग पर पाबंदी लगाई है. अभी तक गांव में दूषित पानी से किसी की तबीयत नहीं बिगड़ी है, और हालात पर नजर बनाए हुए हैं.
पानी के प्रयोग पर पाबंदी
ब्रेड ब्लॉक के बेरा ग्राम पंचायत की सरपंच प्रतिनिधि सुवा लाल गुर्जर ने कहा कि पशु पक्षियों और मछलियों के मरने के बाद प्रशासन से शिकायत की थी. प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम भेज कर पानी के सैंपल लिए. जांच में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया. दूषित पाया गया. पंचायती राज ग्रामीण विकास विभाग में पानी के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी. आशंका है कि गांव के पास बने बायो-डीजल प्लांट का वेस्ट केमिकल तालाब में डालने से पानी जहरीला हुआ है. यह तालाब आस्था का केंद्र है, हर वर्ष दीपावली पर यहां पर घाट पूजन करने की परंपरा है.
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