जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में कक्षा 4 की छात्रा अमायरा की मौत के बहुचर्चित मामले में परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. परिजन जांच से असंतुष्ट नजर आए और उन्होंने कई गंभीर आपत्तियां जताई हैं. अमायरा के पिता विजय और मां शिवानी ने कहा कि पुलिस ने मामले में चालान पेश किया है, लेकिन इसमें कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है. परिजनों ने आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा शामिल नहीं किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है.
पिता विजय मीना ने बताया कि पुलिस ने चालान पेश किया है लेकिन इसमें सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदु दुबे को शामिल नहीं किया है. केवल शिक्षिका को ही इस एक्ट में दोषी बनाया है. स्कूल मालिक सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदु दुबे को केवल लापरवाही और सबूत छिपाने का ही चार्ज लगाया गया है. उन्होंने कहा कि सही आरोप नहीं लगाए गए हैं और प्रिंसिपल की जिम्मेदारी होने के बावजूद उसे बचाया जा रहा है.
'पुलिस हमें ही प्रताड़ित कर रही'
मां शिवानी ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें ही प्रताड़ित करती रही. उन्होंने कहा,"कई बार ऐसे सवाल पूछे गए कि क्या आपका बच्चा मानसिक रूप से ठीक नहीं रहता था. जबकि मैं रोज अपनी बच्ची से बात करती थी और पूछती थी कि क्या हुआ? टीचर ने कैसे पढ़ाया. लेकिन इसके बावजूद ये घटना हो गई. डेढ़ घंटे में बस ये सब हो गया. क्योंकि वो शिक्षक बच्ची के चेहरे के हाव भाव देखने के ही काबिल नहीं है."
उन्होंने न्यायपालिका से न्याय करने की मांग की और कहा कि पुलिस की चार्जशीट सही नहीं है. अमायरा को आत्महत्या करने के लिए फोर्स किया गया था.
1 नवंबर 2025 को अमायरा ने दे दी जान
गौरतलब है कि पिछले साल 1 नवंबर को अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद से ही लगातार माता पिता बच्ची को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. पुलिस ने मामले में चालान पेश किया है. पुलिस ने चालान में नीरजा मोदी स्कूल के मालिक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे, शिक्षिका पुनीता शर्मा और सफाई कर्मी राम को आरोपी बनाया है. हालांकि यह सवाल यह बना हुआ है कि आखिर उस बच्ची ने ये कदम क्यों उठाया.
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