मेला छोटा, सस्पेंस बड़ा: खाटूश्याम लक्खी मेले से 4 दिन क्यों 'गायब' हुए? 5 प्वाइंट्स में समझें पूरी इनसाइड स्टोरी

Lakhi Mela 2026: इस साल खाटूश्यामजी फाल्गुन लक्खी मेला 2026 की अवधि 12 दिन से घटाकर 8 दिन कर दी गई है. 21 से 28 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में VIP दर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और QR कोड आधारित पार्किंग की नई व्यवस्था लागू होगी.

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खाटू मेला 2026: इस बार सिर्फ 8 दिन का होगा मेला, VIP दर्शन पर पूरी तरह रोक
ANI

Rajasthan News: राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में होने वाले वार्षिक फाल्गुन लक्खी मेला 2026 की तारीखों का आधिकारिक ऐलान हो चुका है. इस बार बाबा श्याम का दरबार भक्तों के लिए कुछ नए और कड़े नियमों के साथ सज रहा है. प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए इस साल मेले की अवधि में बड़ा बदलाव किया है, जो पिछले पांच वर्षों में पहली बार देखने को मिल रहा है.

क्यों कम की गई मेले की अवधि? 

आमतौर पर 10 से 12 दिनों तक चलने वाला यह मेला इस बार सिर्फ 8 दिन (21 फरवरी से 28 फरवरी 2026) का होगा. जिला प्रशासन और मंदिर कमेटी ने यह फैसला मुख्य रूप से भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) और 'जीरो रिस्क' सुरक्षा नीति के तहत लिया है. आंकड़ों के मुताबिक, मेले के अंतिम 8 दिनों में ही करीब 20 से 30 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे प्रशासनिक ढांचे पर भारी दबाव पड़ता है. इसी दबाव को कम करने और किसी भी तरह की अप्रिय घटना (जैसे भगदड़) को रोकने के लिए अवधि कम की गई है.

बोर्ड परीक्षा, बैरिकेडिंग और...

मेले में कानून व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है. इस पर खरा उतरने के लिए मशीनरी प्रभावित होती है. जिला प्रशासन और मंदिर कमेटी इस बात पर सहमत हैं कि 7 दिन किसी भी मेले के लिए पर्याप्त हैं. इस फैसले की वजह से खाटूश्यामजी के स्थानीय लोगों को बैरिकेडिंग की वजह से होने वाली परेशानी से जल्द राहत मिल जाएगी. राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं भी इसी दौरान आ रही हैं. लेकिन यह फैसला सभी के लिए राहत भरा रहेगा. 

दर्शन व्यवस्था में 5 बड़े बदलाव

1. तीन निकास द्वार

अब तक मेले में केवल 2 एग्जिट गेट होते थे. भीड़ के अचानक दबाव को बांटने के लिए अब कला भवन की 10 लाइनों में से 4 को गुवाड़ चौक की तरफ मोड़ा जाएगा, जिससे निकासी तेज होगी.

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2. 75 फीट ग्राउंड पर नया फुट ओवरब्रिज

श्रद्धालुओं की कतारों के ऊपर से आवागमन को आसान बनाने के लिए 75 फीट ग्राउंड पर एक नया फुट ओवरब्रिज (FOB) बनाया जा रहा है. इससे लाइन में लगे भक्तों को बिना डिस्टर्ब किए क्रॉसिंग की जा सकेगी.

3. रियल टाइम CCTV निगरानी

सिर्फ मंदिर परिसर ही नहीं, बल्कि अब खाटू पहुंचने वाले रींगस और मंडा मार्ग पर भी CCTV कैमरे लगाए जाएंगे. इससे पुलिस कंट्रोल रूम को यह पता रहेगा कि किस रास्ते से कितनी भीड़ आ रही है, ताकि समय रहते ट्रैफिक डायवर्ट किया जा सके.

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4. बैरिकेडिंग की बढ़ाई गई ऊंचाई

अक्सर श्रद्धालु कम समय में दर्शन के चक्कर में बैरिकेडिंग फांदकर दूसरी लाइन में घुस जाते हैं. इसे रोकने के लिए इस बार बैरिकेडिंग की ऊंचाई बढ़ा दी गई है, जिसे पार करना मुमकिन नहीं होगा.

5. VIP दर्शन पर पूर्ण रोक, नए पार्किंग स्पॉट

सरकारी प्रोटोकॉल को छोड़कर अन्य सभी के लिए VIP दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे. साथ ही, एकादशी की भारी भीड़ के लिए शहर के बाहर वैकल्पिक पार्किंग स्थल विकसित किए गए हैं, जहां QR कोड स्कैन कर पहुंचा जा सकेगा.

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भक्तों के लिए जरूरी सूचना

मेले में व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 5000 जवानों की तैनाती की गई है. यदि आप भी इस साल बाबा श्याम के फाल्गुन मेले में जाने का मन बना रहे हैं, तो इन बदलावों को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा प्लान करें. कम समय और अधिक भीड़ के कारण प्रशासन इस बार नियमों को लेकर काफी सख्त रहेगा. कोशिश करें कि एकादशी (27 फरवरी) से एक-दो दिन पहले या बाद में दर्शन करें, क्योंकि उस दिन सबसे ज्यादा दबाव रहता है.

खाटूश्यामजी का लक्खी मेला क्यों खास है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन माह की शुक्ल एकादशी को ही बर्बरीक (बाबा श्याम) ने अपना शीश भगवान कृष्ण को दान किया था. इसीलिए इस महीने में दर्शन का विशेष महत्व है. भक्त मानते हैं कि इस दौरान बाबा श्याम साक्षात खाटू में विराजमान रहते हैं. इसे 'लक्खी मेला' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें लाखों की तादाद में भक्त (लखदातार के दरबार में) आते हैं. इन 8 दिनों में श्याम भक्त रींगस से खाटू धाम तक (लगभग 17-18 किमी) पैदल यात्रा करते हैं और हाथों में 'निशान' लेकर चलते हैं. दर्शन से पहले भक्त श्याम कुंड में पवित्र डुबकी लगाते हैं. मेले के दौरान मंगला आरती और शृंगार आरती का दृश्य बहुत दिव्य होता है. बाबा का नित्य नया और भव्य शृंगार किया जाता है.

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