Holi Special: Jaisalmer में शाही होली का आगाज, Jalore में चंग की थाप पर थिरके ग्रामीण | Rajasthan

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  • प्रकाशित: फ़रवरी 28, 2026

जैसलमेर में कहावत है- "होली या तो बरसाने की या जैसाणे (जैसलमेर) की।" यहाँ रंग एकादशी से ही उत्सव शुरू हो जाता है। नगर आराध्य देव लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर में पूर्व महारावल चैतन्य राज सिंह ने रसिकों के साथ गुलाल खेलकर सदियों पुरानी रियासत कालीन परंपरा का निर्वहन किया। पुष्करणा समाज की 'गैर' और 'फाग गायन' से पूरी स्वर्ण नगरी भक्ति और उल्लास में डूबी हुई है. वहीं जालोर के ग्रामीण अंचलों में शाम ढलते ही 'चंग' की थाप गूंजने लगती है। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर कोई पैरों में घुंघरू बांधकर पारंपरिक 'गैर नृत्य' कर रहा है। यहाँ होली से लेकर शीतला सप्तमी तक चलने वाला यह उत्सव लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करता है

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