अजमेर: NSP पोर्टल पर सेंध लगा उड़ाए लाखों की स्कॉलरशिप, 2100 बैंक खातों में भेजी थी राशि

अजमेर पुलिस ने पश्चिम बंगाल से एक साइबर गैंग के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी करके लाखों रुपये ठगे थे.

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Ajmer Scholarship Fraud news
NDTV

Ajmer Scholarship Scam:  राजस्थान की अजमेर जिला पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर फर्जी तरीके से आवेदन कर सरकारी छात्रवृत्ति राशि का गबन करने वाले एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है. सिविल लाइंस थाना पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है,

30 शिक्षण संस्थानों के नाम पर हुआ था फ्रॉड

मामले का खुलासा करते हुए SP हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि साल 2021-22 और 2022-23 के दौरान भारत सरकार के अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से दी जाने वाली छात्रवृत्ति में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की बात सामने आई थी। गिरोह ने करीब 30 शिक्षण संस्थानों से जुड़े आवेदनों में फर्जी और गलत जानकारियां भरकर लाखों रुपये की सरकारी राशि हड़प ली थी. इस संबंध में जिला जिलाधिकारी की ओर से 2 जून 2025 को सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज कराया गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर एक विशेष एसआईटी  का गठन किया गया था, जिसने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपियों को पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के चकलागंज और काजीगच्छ गांवों से दबोच लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तबरेल अहमद और सानमांझ के रूप में हुई है.

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डिजिटल उपकरणों और फर्जी दस्तावेजों बरामद

लिस ने आरोपियों के कब्जे से 85 मोबाइल सिम, दो लैपटॉप, दो प्रिंटर, सात चांस फिंगर प्रिंट, फिंगर प्रिंट मशीन, सात एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक सहित कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए. इसके अलावा आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल से करीब 2100 बैंक खातों का विवरण, 1000 से अधिक चांस फिंगर प्रिंट, 2000 लोगों के आधार कार्ड और फोटो तथा करीब 1500 स्टाम्प की प्रतियां मिली हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है.

ऑनलाइन सत्यापन का उठाया नाजायज फायदा

सीओ नॉर्थ शिवम जोशी ने मामले की आगे की जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना काल के दौरान जब दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन बंद था  और पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया हुआ था. जिसका फायदा उठाते हुए इस गिरोह ने स्कूलों के डाइस कोड और अन्य जानकारी इंटरनेट से जुटाई तथा फर्जी सिम के जरिए ओटीपी प्राप्त कर नोडल अधिकारियों से सत्यापन करवाकर छात्रवृत्ति राशि के नाम पर कई लाख हड़प लिए.

इसके बाद उन्होंने फर्जी सिम कार्ड्स और पहले से कलेक्ट किए गए डिजिटल हेड प्रिंट का इस्तेमाल कर खुद ही नोडल अधिकारियों के स्तर पर सत्यापन करवा लिया. जैसे ही सरकार के जरिए स्कॉलरशिप की राशि स्वीकृत हुई, आरोपियों ने उसे फर्जी तरीके से खोले गए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर ठिकाने लगा दिया. फिलहाल पुलिस की विशेष टीम इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके पीछे छिपे मास्टरमाइंड की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है.

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