जयपुर की सड़कों पर घूमता टटलूबाज गैंग, ठगी के लिए अपनाता ये तरीका; 5 बदमाश गिरफ्तार

राजस्थान की राजधानी जयपुर में सक्रिय एक खतरनाक ठग गिरोह को पुलिस ने पकड़ लिया है. यह गैंग सोशल मीडिया के जरिए लोगों को पैसों का लालच देकर ठगता था और नकली नोट थमा देता था.

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी.

Rajasthan News: राजस्थान में जयपुर की सड़कों पर घूमते एक खतरनाक ठग गिरोह का राज अब खुल चुका है. राजस्थान की राजधानी में सक्रिय इस टटलूबाज गैंग ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया था. जयपुर साउथ पुलिस ने तेज कार्रवाई करते हुए इस गिरोह को पकड़ लिया. डीसीपी राजर्षि राज की टीम ने सूझबूझ से काम लिया और ठगों के जाल को तोड़ दिया. यह खबर शहरवासियों के लिए राहत की सांस लेकर आई है क्योंकि अब ऐसे अपराधी सलाखों के पीछे हैं.

सूचना पर पुलिस की दबिश

पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि जयपुर में एक ठग गिरोह सक्रिय है जो लोगों को लूट रहा है. इस सूचना के आधार पर टीम ने युवक अमित को हिरासत में लिया. पूछताछ में अमित ने गिरोह के राज उगल दिए.

पुलिस ने तुरंत जांच तेज की और अमित श्योराण हर्ष यादव सचिन कमल चौधरी और राहुल डोडवालिया को गिरफ्तार कर लिया. ये सभी शातिर ठग हैं जो संगठित तरीके से अपराध कर रहे थे. डीसीपी ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान कोई हादसा नहीं हुआ और टीम ने सावधानी से काम किया.

बरामद हुआ ठगी का सामान

पुलिस ने गिरोह के कब्जे से कई चीजें जब्त कीं जो उनके अपराधों की गवाही देती हैं. इनमें 5 मोबाइल फोन 40 सिम दो थार गाड़ियां एक स्विफ्ट कार दो पावर बाइक रस्सी टेप 62 हजार रुपए की नकदी और 3.50 लाख रुपए के नकली नोट शामिल हैं.

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ये सामान दिखाता है कि गिरोह कितना तैयार था. गाड़ियां और बाइक से वे तेजी से भागते थे जबकि रस्सी और टेप से शिकार को काबू करते थे. नकली नोट उनके मुख्य हथियार थे जो असली दिखते थे.

ठगी का चालाक तरीका

यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए कॉल सेंटर से लोगों को फंसाता था. वे पैसा कई गुना करने का लालच देते और असली नोट दिखाकर विश्वास जीतते. शिकार के झांसे में आने पर उसे सुनसान जगह पर बुलाते. वहां असली नोट लेकर नकली थमा देते.

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विरोध करने पर रस्सी से बांधकर मुंह पर टेप लगा देते. फिर अपहरण कर किसी दूर जगह पर फेंक देते. इस तरह वे बिना पकड़े ठगी करते रहते. पीड़ित डर से चुप रहते थे लेकिन अब पुलिस ने सच्चाई सामने ला दी.

जांच में बड़ा खुलासा

पुलिस को गिरोह से एक डायरी मिली जिसमें हिसाब-किताब लिखा था. डायरी से पता चला कि सिर्फ नवंबर महीने में ही उन्होंने 50 लाख रुपए की ठगी की. पहले कोई पीड़ित शिकायत नहीं करता था क्योंकि गिरोह के डर से सब चुप थे. लेकिन पुलिस ने खुद पीड़ितों से संपर्क किया और उनके बयान दर्ज करवाए. अब तक इस गिरोह के खिलाफ पांच मामले दर्ज हो चुके हैं. डीसीपी का मानना है कि आगे पूछताछ से कई और अपराधों का पर्दाफाश होगा.

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