Ram Mandir: अयोध्या में निर्माणधीन भव्य राम मंदिर के अभिषेक के वक्त भगवान राम की जिस मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा, उसका चयन नए साल के पहले दिन ही कर लिया गया है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) ने खुद इस बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए रामभक्तों को बड़ी जानकारी दी है.
'जहां राम, वहां हनुमान'
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट से भगवान राम की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ''जहां राम हैं, वहां हनुमान हैं'. अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मूर्ति का चयन फाइनल हो गया है. हमारे देश के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार, हमारे गौरव योगीराज अरुण के द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति अयोध्या में स्थापित की जाएगी. यह राम हनुमान के अटूट रिश्ते का एक और उदाहरण है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि हनुमान की भूमि कर्नाटक से रामललानी के लिए यह एक महत्वपूर्ण सेवा है.'
कैसे हुआ मूर्ति का चयन?
सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की बैठक में ये हुई है. इस दौरान अलग-अलग मूर्तिकारों द्वारा बनाए गए तीनों डिजाइनों को मेज पर रखा गया. इस दौरान 51 इंच ऊंची मूर्ति के तीन डिजाइनों को सबसे अच्छी दिव्यता के आधार पर परखा गया. ये भी देखा गया कि रामलला की तीनों मूर्ति में बच्चे वाली झलक किसमें दिख रही है. इसी आधार पर अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई मूर्ति का बोर्ड ने चयन किया. उनकी मूर्ति को सबसे ज्यादा वोट मिले. अब 22 जनवरी को मंदिर के अभिषेक के समय इसे गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा.
22 जनवरी को होगी प्राण प्रतिष्ठा
ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने कहा, 'अभिषेक समारोह 16 जनवरी से शुरू होकर सात दिनों की अवधि में आयोजित किया जाएगा. 16 जनवरी को मंदिर ट्रस्ट द्वारा नियुक्त यजमान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र प्रायश्चित समारोह का संचालन करेंगे. सरयू नदी के तट पर 'दशविध' स्नान, विष्णु पूजा और गायों को प्रसाद दिया जाएगा. इसके बाद 17 जनवरी को भगवान राम की बाल स्वरूप (राम लला) की मूर्ति लेकर एक जुलूस अयोध्या पहुंचेगा. मंगल कलश में सरयू जल लेकर श्रद्धालु राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचेंगे. 18 जनवरी को गणेश अंबिका पूजा, वरुण पूजा, मातृका पूजा, ब्राह्मण वरण और वास्तु पूजा के साथ औपचारिक अनुष्ठान शुरू होंगे. 19 जनवरी को, पवित्र अग्नि जलाई जाएगी, इसके बाद 'नवग्रह' की स्थापना और 'हवन' (आग के चारों ओर पवित्र अनुष्ठान) किया जाएगा.
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