सभी स्वास्थ्य लक्ष्यों के लिए वन-स्टॉप समाधान है खुशी बेबी ऐप, NDTV कॉन्क्लेव में बोले ऐप के सह-संस्थापक मो. शहनवाज

कॉन्क्लेव में बोलते हुए खुशी बेबी एप, सह-संस्थापक मो. शहनवाज हेल्थ ने कहा राजस्थान में राजस्थान में बुनियादी ढांचे और मानव संसाधनों में वृद्धि हुई है, ख़ुशी बेबी ऐप सभी स्वास्थ्य लक्ष्यों के लिए वन-स्टॉप समाधान है.

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एनडीटीवी कॉन्क्लेव में खुशी बेबी ऐप सह संस्थापक
Jaipur:

अजमेर के पुष्कर में स्थित होटल प्रताप महल में रविवार को एनडीटीवी राजस्थान कॉन्क्लेव में खुशी बेबी एप, सह-संस्थापक मो. शहनवाज शिरकत किया. कॉन्क्लेव में मो. शहनवाज ने दावा किया कि राजस्थान में राजस्थान में बुनियादी ढांचे और मानव संसाधनों में वृद्धि हुई है.इस दौरान ख़ुशी बेबी ऐप पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि खुशी बेबी ऐप सभी स्वास्थ्य लक्ष्यों के लिए वन-स्टॉप समाधान है.

खुशी बेबी ऐप का उपयोग हेल्‍थ वर्कर द्वारा गर्भवती और नई माताओं, अन्य रोगियों और उनके परिवारों के हेल्‍थ रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए किया जाता है. यह प्रभावी रूप से पेपर बेस्‍ड रजिस्ट्री को बदल रहा है और रोगी की हेल्‍थ हिस्‍ट्री तक पहुंच को आसान बना रहा है.

रोगी और परिवार का रिकार्ड रखता है ऐप

ख़ुशी बेबी ऐप एक ऐसा डिजिटल ऐप है जिससे रोगियों और परिवारों के रिकार्ड को फीड रहता है. एक नॉन-प्रोफिट ऑर्गेनाइजेशन, खुशी बेबी, डिजिटल लेंस के माध्यम से राजस्थान में सामुदायिक स्वास्थ्य निगरानी का चेहरा बदल रहा है.  संगठन ने ग्रामीण भारत में कम सेवा वाली आबादी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा के उत्थान के लिए प्रौद्योगिकी के साथ परंपरा को जोड़ने के उद्देश्य से एक मोबाइल एप्लिकेशन ‘खुशी बेबी' बनाया है. 

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वर्ष 2014 में उदयपुर से खुशी बेबी के COO व को-फाउंडर मोहम्मद शाहनवाज ने संगठन के CEO व को-फाउंडर रुचित नागर उनके साथ मिलकर इसकी शुरुआत की थी.

डिजिटलीकरण से हो रही है आसानी

भारत में नर्सों, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा), हेल्‍पर नर्स दाई (ANM) सहित हेल्‍थ वर्कर ने रोगियों या परिवारों का रिकॉर्ड रखने के लिए रजिस्टर भरने में लंबे समय तक घंटों बिताए हैं. लेकिन जयपुर स्थित एक गैर सरकारी संगठन, खुशी बेबी, डिजिटल लेंस के माध्यम से राजस्थान में सामुदायिक स्वास्थ्य निगरानी का चेहरा बदल रहा है.

महामारी के दौरान ऐप की रही महत्वपूर्ण भूमिका

मूल रूप से  जयपुर और उदयपुर में काम करने वाले इस संगठन ने राजस्थान सरकार के साथ मिलकर प्रदेश के गांव-गांव में कोविड-19 को लेकर किए गए सर्वे के दौरान डिजिटल डेटा मैनेजमेंट में बखूबी भूमिका अदा की. इस मैनेजमेंट से प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति के बारे में उसके कोविड ही नहीं, अन्य सभी प्रकार के हेल्थ के डेटा एनालिसिस में जबरदस्त मदद मिली. इसके जरिए प्रदेशवासियों की सेहत का हाल जाना गया फिर उसी के आधार पर कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान उनकी जान बचाने की भूमिका को मजबूत किया. 

भारत में नर्सों, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा), हेल्‍पर नर्स दाई (ANM) सहित हेल्‍थ वर्कर ने रोगियों या परिवारों का रिकॉर्ड रखने के लिए रजिस्टर भरने में लंबे समय तक घंटों बिताए हैं. लेकिन जयपुर स्थित एक गैर सरकारी संगठन, खुशी बेबी, डिजिटल लेंस के माध्यम से राजस्थान में सामुदायिक स्वास्थ्य निगरानी का चेहरा बदल रहा है.

इंटरनेशनल ट्रिनिटी चैलेंज का मिला अवार्ड

राजस्थान के हेल्थ सेक्टर में डिजिटल डेटा एनालिसिस के लिए काम करने वाले संगठन 'खुशी बेबी' को 'इंटरनेशनल ट्रिनिटी चैलेंज' अवॉर्ड से भी नवाजा गया है. लंदन में हुए एक समारोह में संगठन को दुनिया के अंतिम 8 संगठनों में से एक के रूप में शामिल करते हुए तीसरे स्थान पर रखा गया था. इन अंतिम 8 को अवार्ड के रूप में 6.60 लाख यूएस डॉलर की कैश राशि से सम्मानित किया गया है.

हेल्थ रिकार्ड रखने में मददगार

संगठन ने ग्रामीण भारत में कम सेवा वाली आबादी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा के उत्थान के लिए प्रौद्योगिकी के साथ परंपरा को जोड़ने के उद्देश्य से एक मोबाइल एप्लिकेशन ‘खुशी बेबी' बनाया. एप्‍लीकेशन का यूज हेल्‍थ वर्कर द्वारा गर्भवती और नई माताओं, अन्य रोगियों और उनके परिवारों के हेल्‍थ रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए किया जाता है. यह प्रभावी रूप से पेपर बेस्‍ड रजिस्ट्री को बदल रहा है और रोगी की हेल्‍थ हिस्‍ट्री तक पहुंच को आसान बना रहा है.

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एप्‍लीकेशन का यूज हेल्‍थ वर्कर द्वारा गर्भवती और नई माताओं, अन्य रोगियों और उनके परिवारों के हेल्‍थ रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए किया जाता है. यह प्रभावी रूप से पेपर बेस्‍ड रजिस्ट्री को बदल रहा है और रोगी की हेल्‍थ हिस्‍ट्री तक पहुंच को आसान बना रहा है.

2014 में उदयपुर से हुई थी शुरुआत

वर्ष 2014 में उदयपुर से खुशी बेबी के COO व को-फाउंडर मोहम्मद शाहनवाज ने संगठन के CEO व को-फाउंडर रुचित नागर उनके साथ मिलकर इसकी शुरुआत की थी. तब सभी प्रकार की बीमारियों के बारे में डिजिटल सॉल्युशन पर काम किया. उसके बाद संगठन का दफ्तर जयपुर में भी पहुंचा और प्रदेश की जनता के लिए काम की शुरुआत हुई. सभी ने मिलकर कोविड-19 महामारी जैसे चैलेंज को हाथ में लिया और डोर-टू-डोर सर्वे के डिजिटल सॉल्युशन तक पहुंचे.

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