Rajasthan News: देश भर में 'कोचिंग नगरी' के नाम से मशूहर राजस्थान के कोटा (Kota) शहर को अब एक और नई पहचान मिल गई है. कोटा अब दुनिया का वह दूसरा शहर बन गया है जहां मुख्य सड़कों और चौराहों पर ट्रैफिक लाइट्स (2nd Signal Free City in World) नहीं हैं. यह अनूठा ट्रैफिक सिग्नल-फ्री मॉडल शहर के आवागमन को इतना सुगम बना चुका है कि अब इस शहर के चर्चे दुनिया के नक्शे पर होने लगे हैं. कोटा की यह उपलब्धि तब सुर्खियों में आई, जब प्रसिद्ध उद्योगपति और महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) इस व्यवस्था से प्रभावित होकर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर दी. शहरवासी इस मॉडल को लेकर बेहद गर्व महसूस करते हैं, जिसे पूर्व सरकार के एक बड़े विजन का नतीजा बताया जा रहा है.
कैसे मिली ट्रैफिक सिग्नल से मुक्ति?
कोटा पहले औद्योगिक नगरी था, फिर कोचिंग हब बना. जैसे-जैसे आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ी, यातायात का दबाव भी तेजी से बढ़ा. शहर को भविष्य के लिहाज से तैयार करने के लिए, पूर्व सरकार में यूडीएच (UDH) मंत्री शांति धारीवाल ने एक बड़ा विकास विजन सामने रखा. उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसका मॉडल भूटान की राजधानी थिंपू को बनाया गया. थिंपू ही दुनिया का एकमात्र शहर था जहां कोई ट्रैफिक सिग्नल नहीं है.
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कोटा की मुख्य सड़कों, चौराहों और तिराहों की विस्तृत मैपिंग की गई. उन सभी स्थानों को चिन्हित किया गया जहां ट्रैफिक लाइट की जरूरत थी या यातायात का अधिक दबाव था. इन जगहों पर यातायात को निर्बाध बनाने के लिए फ्लाईओवर और अंडरपास डिजाइन किए गए. साल 2020 से 2023 के बीच इस प्रोजेक्ट पर लगभग ₹250 करोड़ खर्च हुए और इसे पूरा करने में 3 साल का समय लगा. कोटा में कुल 3 अंडरपास और 3 फ्लाईओवर सहित कई एलिवेटेड रोड बनाए गए, जिनमें से अधिकांश का निर्माण एक साथ पूरा किया गया.
प्रमुख निर्माण कार्य और उनका असर
₹250 करोड़ की लागत से कोटा में ट्रैफिक सिग्नल फ्री सिस्टम लागू करने के लिए ये बड़े काम किए गए:-
| स्थान | निर्माण का प्रकार | लागत (लगभग) |
| सिटी मॉल | 650 मीटर लंबा फ्लाईओवर | ₹47 करोड़ |
| एक्रोड्राम सर्किल | अंडरपास ओवरब्रिज | ₹40 करोड़ |
| अंटाघर चौराहा | अंडरपास | ₹29 करोड़ |
| अनंतपुरा चौराहा | 2-लेन फ्लाईओवर | ₹65 करोड़ |
| गुमानपुरा तिराहा | 1200 मीटर लंबा फ्लाईओवर | ₹50 करोड़ |
| गोबरिया बावड़ी | अंडरपास | ₹30 करोड़ |
| कोटड़ी चौराहा | एलिवेटेड रोड | ₹5 करोड़ |
इन सभी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद, कोटा न सिर्फ दिखने में सुंदर हो गया, बल्कि कोटा रेलवे स्टेशन से अनंतपुरा (झालावाड़ रोड) तक लगभग 15 किलोमीटर का मुख्य रास्ता पूरी तरह से ट्रैफिक लाइट फ्री हो गया.
आनंद महिंद्रा ने पूछा- 'क्या यह पूरे शहर में लागू है?'
कोटा के इस अनूठे मॉडल ने तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी, जब महिंद्रा समूह के प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर इसकी तारीफ की. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'राजस्थान का कोटा भारत का पहला ऐसा शहर है जहां एक भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं है. प्रभावित होकर उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए यह भी पूछा कि "क्या यह पूरे शहर में लागू हो गया है क्या? वाकई बेहद प्रभावशाली और जरूरत अनुसार है."
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कोटा वालों के लिए यह एक बड़ी राहतकोटा के निवासियों और यहां पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए यह ट्रैफिक सिग्नल फ्री सिस्टम एक बड़ी राहत है. इससे लोगों के समय की बचत हो रही है, ईंधन की बचत हो रही है और यातायात पुलिस को भी केवल सुरक्षा के लिए मुख्य स्थानों पर तैनात रहने में मदद मिल रही है. कोटा के व्यापारी, युवा और शहरवासी इस बदलाव से खुश हैं और इसे विकास का सही विजन मानते हैं.
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