70 करोड़ का है इस प्रसिद्ध पेड़े का कारोबार, देशभर में होती है ऑनलाइन डिलीवरी

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे के पेड़े देशभर में प्रसिद्ध हैं. इन पेड़ों की खासियत यह है कि इनमें दो आंखें होती हैं. इसके अलावा, ये पेड़े साइज में बड़े और चपटे होते हैं. चिड़ावा के पेड़े शुद्ध मावा से बनाए जाते हैं और इनमें कोई मिलावट नहीं होती है. यही वजह है कि ये लंबे समय तक खराब नहीं होते हैं. त्योहारी सीजन के अलावा सालभर चिड़ावा के पेड़ों की डिमांड देशभर से आती रहती है.

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दो आंख वाला पेड़ा

Chidawa Peda: दिवाली के सीजन में मिठाई की बात चलती है तो जुबां पर झुंझुनूं के चिड़ावा का नाम जरूर आता है. चिड़ावा के पेड़े देशभर में प्रसिद्ध है. विदेशों में रहने वाले प्रवासी भी इनके मुरीद हैं. चिड़ावा कस्बें में पेड़ों का सालाना कारोबार करीब 70 करोड़ रुपए का है. इस काम से जुटे करीब 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है.

दो आंख वाला पेड़ा

चिड़ावा के पेड़ों की खासियत भी अनूठी है. यहां के पेड़े में दो आंखें होती हैं. यानी पेड़े में अंगुली का निशान एक नहीं, बल्कि दो होते हैं. बाकी देश में कहीं भी ऐसा नहीं होता है. सब जगह के पेड़े में सिर्फ एक ही निशान होता है. चिड़ावा के कारोबारी इसे दो आंख वाला पेड़ा कहते हैं. दो आंख के अलावा चिड़ावा का पेड़ा साइज में बड़ा और चपटा होता है. बाकी पेड़े साइज में छोटे और मोटे होते हैं.

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चिड़ावा के पेड़ों की एक अहम विशेषता यह भी है कि यह जल्दी खराब नहीं होते. इसकी वजह शुद्ध मावा, यहां का पानी, दूध व उसकी घुटाई को माना जाता है.

चिड़ावा के पेड़े की खास बात यह है कि ये लंबे समय तक खराब नहीं होते हैं. क्योंकि इनमें शुद्ध मावा काम में लिया जाता है. बनाने की तकनीक भी ऐसी है कि इन्हें कितने भी दिन सुरक्षित रखा जा सकता है.

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ऑनलाइन ऑर्डर भी होता है ये पेड़ा

त्योहारी सीजन के अलावा सालभर चिड़ावा के पेड़ों की डीमांड देशभर से आती रहती है. इसके लिए चिड़ावा के व्यापारियों ने अपनी साईट बना रखी हैं जिसपर लोग ऑनलाइन आर्डर करते हैं. वही सालासर और खाटू श्याम में भी श्रद्धालु सवामनी के लिए यहाँ से पेड़ों मंगवाते हैं.

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