चूरू की ताल छापर सेंचुरी में बढ़ रहा है काले हिरणों का कुनबा, कृष्णमृग अभयारण्य में पहुंच रहे हैं सैलानी

एशिया में पहचान रखने वाले तालछापर कृष्ण मृग अभयारण्य में काले हिरणों का कुनबा लगातार बढ रहा है. अब इनकी बड़ी कुलांचों के लिए अभयारण्य में जमीन छोटी पड़ने लगी है.

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ताल छापर सेंचुरी में बढ़ रहा काले हिरण का कुनबा.

Churu News: काले हिरणों की सबसे बड़ी आबादी के तौर पर एशिया में पहचान रखने वाले तालछापर कृष्ण मृग अभयारण्य में काले हिरणों का कुनबा लगातार बढ रहा है. अब इनकी बड़ी कुलांचों के लिए अभयारण्य में जमीन छोटी पड़ने लगी है. बता दें कि विश्वविख्यात तालछापर में हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक परिवार के साथ पहुंचते हैं. विश्व विख्यात तालछापर अभयारण्य में अब शीतकालीन अवकाश होते ही पर्यटकों का आने का सिलसिला और बढ़ गया है.

अफ्रीकी और मध्य यूरोप में पाए जाने वाले प्रवासी पक्षी पहुंचे

क्षेत्रीय वन अधिकारी उमेश बागोतिया ने बताया कि प्रतिवर्ष विदेशी पक्षी यहां आते हैं. इस बार सबसे पहले अफ्रीकी और मध्य यूरोप में पाए जाने वाले पक्षी ग्रेटर फ्लेमिंगो ने अभयारण्य में पड़ाव डाला है. ग्रेटर फ्लेमिंगो खूबसूरती के कारण हंस प्रजाति के जीवों में राजहंस के नाम से भी जाना जाता है. बेहद सुंदर दिखने वाला यह पक्षी 3 से 4 घंटे तक एक टांग पर खड़ा रह सकता है. यहां तक की एक टांग पर इतने ही समय तक नींद भी ले सकता है. इसकी गर्दन लंबी, लाल चोंच वाले इस राजहंस की लंबाई 120 से 130 सेंमी. होती है.

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पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि तालछापर कृष्णमृग अभयारण्य का सपाट भूभाग मोथीया घास की प्रचुरता के लिए मशहूर है. यहां का हैबिटेट प्रवासी पक्षियों के अनुकूल होने व अभयारण्य का भौगोलिक परिवेश सुरक्षित होने के कारण प्रवासी पक्षियों की संख्या का ग्राफ प्रतिवर्ष बढ़ता जा रहा है.

सुविधाओं में विस्तार

डीएफओ सविता दहिया ने बताया कि आनेवाले दिनों में अभयारण्य की सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने की कवायद शुरू हो गई है. उन्होंने बताया कि वैसे तो तालछापर को किसी तरह की पहचान की आवश्यकता नहीं है. लेकिन हाइवे पर आनेवाले लोगों को इसके बारे में पता नहीं चल पाता है. इसको ध्यान में रखते हुए हाइवे पर इसके बड़े-बड़े बोर्ड लगाए जाएंगे । इसके अलावा आकर्षक स्वागत द्वार भी तैयार किया जाएगा.

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