एक गरीब गार्ड का पर्यावरण बचाने का जुनून, कबाड़ से बना दिया ऑक्सीज़ोन

आज विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर कोटा से एक ऐसी मिसाल की कहानी जो अपने छोटे से प्रयास से धरती की आबोहवा को दुरुस्त रखने में योगदान दे रहे हैं.

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फिरोज खान ने अपने घर के हर कोने को हरा-भरा रखा हुआ है
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विश्व पर्यावरण दिवस पर जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बातें कर रही है, तब कोटा के एक शख्स पिछले कई वर्षों से इसे अपने जीवन का मिशन बनाए हुए हैं. प्राइवेट गार्ड की मामूली से नौकरी करने वाले फिरोज खान ने अपने घर को ऑक्सीजन से भरपूर एक ऐसा 'ऑक्सीजोन' बना दिया है, जहां सैकड़ों प्रजातियों के पौधे सांस लेते नजर आते हैं. खास बात यह है कि जिन टूटे कप, पुराने टायर और कबाड़ को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, उसी में फिरोज नई जिंदगी उगा देते हैं. अब उनकी मांग है कि सरकार हर घर के बाहर पौधा लगाने और उसके रखरखाव को लेकर कानून बनाए.

कोटा के प्रकृति प्रेमी फिरोज खान के घर का हर कोना हरियाली से भरा हुआ है. टूटे हुए कप, पुराने टायर, प्लास्टिक के डिब्बे, कबाड़ का सामान और अनुपयोगी वस्तुएं यहां पौधों के नए घर बन चुकी हैं. फिरोज खान का कहना है कि पर्यावरण बचाने की शुरुआत घर से होनी चाहिए. यही वजह है कि उन्होंने वर्षों से पौधे लगाने और उन्हें बचाने का अभियान अपने स्तर पर चला रखा है. 

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बैग में किताबों से ज्यादा पौधे

फिरोज बताते हैं कि उनका पौधों से लगाव बचपन से रहा है. हालात ऐसे थे कि स्कूल बैग में किताबों से ज्यादा पौधे मिलते थे. कई बार शिक्षक इसकी शिकायत परिजनों से भी करते थे, लेकिन पौधों के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ.आज यही जुनून उन्हें पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बना रहा है.

फिरोज खान के घर
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नदी-नालों के किनारे जहां भी उन्हें कोई पौधा दिखाई देता है, उसे बचाकर अपने घर ले आते हैं. वर्षों की मेहनत का नतीजा है कि उनके घर में सैकड़ों प्रजातियों के पौधे मौजूद हैं. कुछ बोनसाई पौधे तो 35 से 40 साल पुराने हैं, जिन्हें उन्होंने बेहद सहेजकर रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "एक पेड़ मां के नाम" अभियान से प्रेरित फिरोज अब इससे एक कदम आगे बढ़ने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जिस तरह घर बनाने के नियम होते हैं, उसी तरह हर घर के बाहर कम से कम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण को लेकर भी कानून बनाया जाना चाहिए. 

छत पर रखे हुए अलग प्रजातियों के पौधे
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सबसे बड़ा संदेश

उनका मानना है कि यदि हर परिवार एक पौधे की जिम्मेदारी ले ले तो शहरों की तस्वीर और पर्यावरण दोनों बदल सकते हैं. आज जब बढ़ता प्रदूषण और घटती हरियाली बड़ी चुनौती बन चुकी है, तब फिरोज खान जैसे लोग उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आ रहे हैं. बिना किसी सरकारी सहायता और बड़े संसाधनों के उन्होंने यह साबित कर दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल अभियानों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी और जुनून से भी संभव है. 

विश्व पर्यावरण दिवस पर फिरोज खान की यह पहल सिर्फ पौधे लगाने की कहानी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है कि अगर इच्छा हो तो कबाड़ भी हरियाली का आधार बन सकता है और एक व्यक्ति भी पर्यावरण की लड़ाई में बड़ा बदलाव ला सकता है.

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