राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau ACB) अक्सर भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकंजे में लेने के लिए अभियान चलाता है. लेकिन भ्रष्टाचार के तार सरकारी कार्यालयों तक ही नहीं बल्कि शिक्षण संस्थानों में भी फैले हुए हैं. इसी तरह का एक मामला राजस्थान के टोंक जिले में आया है. एसीबी ने यहां के डॉ.के.एन. मोदी विश्वविद्यालय से दो प्रोफेसरों को रिश्वत के पैसे लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. इन प्रोफेसरों पर आरोप है कि उन्होंने एक छात्र का अटेंडेंस बढ़ाने के लिए उससे रिश्वत मांगी थी.
एसीबी की ओर से जानकारी दी गई है कि टोंक में बनस्थली रोड, निवाई स्थि डॉ.के.एन. मोदी विश्वविद्यालय में एसोसियेट प्रोफेसर (विभागाध्यक्ष) डॉ. मीनू गंगल हाल और असिस्टेंट प्रोफेसर (सहयोगी) रमेश चंद मीणा हाल को 20000 रूपये की रिश्वत राशि लेते हुर गिरफ्तार किया गया है.
बी.एड. के छात्र ने एसीबी से की थी शिकायत
एसीबी के महानिदेशक पुलिस, गोविंद गुप्ता ने बताया कि एसीबी की टोंक इकाई के पास इस विश्वविद्यालय के एक छात्र ने शिकायत भेजी थी. यह छात्र यहां से वर्ष 2024-26 बी.एड. के दो वर्षीय कोर्स की पढ़ाई कर रहा है. उसने अपनी शिकायत में बताया कि डॉ. मीनू और रमेश मीणा ने आपस में मिलीभगत कर अनुपस्थिति को सही करने और मुख्य परीक्षा में बैठाने के लिए प्रवेश पत्र देने की एवज में उससे 23000 रूपये की रिश्वत मांगी थी.
एसीबी ने किया ट्रैप
छात्र की शिकायत पर एसीबी के उप महानिरीक्षक पुलिस अजमेर रेंज, नारायण टोगस की निगरानी में ऋषिकेश मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसीबी टोंक ने जाल बिछाया. इसके बाद डॉ. मीनू गंगल ने अपने कार्यालय कक्ष में अपने सहयोगी आरोपी रमेश चंद मीणा को परिवादी से 20000 रूपये की रिश्वत राशि दिलवाई. आरोपी रमेश मीणा ने राशि को हाथों से गिनकर अपनी पैंट की जेब में रखा. एसीबी टीम ने उसके पास से रिश्वत राशि बरामद की जिसके बाद दोनों प्रोफेसरों को गिरफ्तार कर लिया गया.
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में आरोपियों से पूछताछ कर आगे की कार्यवाही की जा रही है.
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