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आदर्श घोटाला: आरोपियों के वकीलों को ही राजस्थान सरकार ने अपना भी वकील बनाया, जूली ने उठाये सवाल 

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा केवल दिखावा साबित हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा सभी मुकदमों को क्लब करवाकर आरोपियों को कानूनी राहत दिलाने की प्रतीत होती है, जिससे लाखों पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में और देरी हो सकती है.

आदर्श घोटाला: आरोपियों के वकीलों को ही राजस्थान सरकार ने अपना भी वकील बनाया, जूली ने उठाये सवाल 

Rajasthan: आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में प्रदेश के लाखों निवेशकों की जमा पूंजी डूबने के मामले को लेकर मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में जोरदार बहस देखने को मिली. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय आरोपियों को संरक्षण देने का काम कर रही है.

जूली ने सदन में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस घोटाले के मुख्य आरोपियों और सह-आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों को ही सरकार ने इस केस में अपना पक्ष रखने के लिए नियुक्त कर दिया है. उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे वकीलों के जरिए पीड़ितों का पैसा वापस आएगा या आरोपी कानूनी राहत लेकर बच निकलेंगे.

''सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस' का दावा केवल दिखावा''

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस' का दावा केवल दिखावा साबित हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा सभी मुकदमों को क्लब करवाकर आरोपियों को कानूनी राहत दिलाने की प्रतीत होती है, जिससे लाखों पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में और देरी हो सकती है.

''राजस्थान के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक''

घोटाले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए जूली ने कहा कि यह राजस्थान के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक है. उन्होंने बताया कि करीब 22 लाख लोगों के लगभग 14 हजार करोड़ रुपये की ठगी की गई है. आरोप है कि करीब 200 लोगों के संगठित गिरोह ने सवा सौ से अधिक शेल कंपनियां बनाकर आम लोगों की मेहनत की कमाई हड़प ली.

बढ़ती कीमतों पर सरकार से जवाब मांगा

सदन में जूली ने महंगाई और कानून व्यवस्था के मुद्दे भी उठाए. उन्होंने गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर सरकार से जवाब मांगा कि क्या आम जनता को राहत देने के लिए कोई सब्सिडी योजना लाई जाएगी. वहीं टोंक जिले में वाहन चोरी के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दर्ज 1433 मामलों में से 1056 वाहन अब तक बरामद नहीं हुए हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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