Private bus operators on strike: राजस्थान में निजी बस संचालकों ने राजस्थान परिवहन विभाग की नई गाइडलाइन का विरोध शुरू कर दिया है. विभाग की कार्रवाई के खिलाफ अजमेर में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ. जयपुर रोड स्थित निजी बस स्टैंड पर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बस संचालक शामिल हुए. संचालकों ने सरकार, परिवहन मंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक निजी बसों की हड़ताल जारी रहेगी. बस संचालकों का कहना है कि जिन बसों को फिटनेस टेस्ट में पास किया जा चुका है, उन्हें अब अचानक गलत ठहराकर चालान काटे जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है. निजी बस संचालकों की मांग है कि यदि किसी बस में कमी है तो पहले उसकी जानकारी दी जाए और सुधार का अवसर दिया जाए. उसके बाद कार्रवाई की जानी चाहिए.
संचालकों का आरोप- लाखों रुपए के चालान कट रहे
संचालकों का आरोप है कि विभाग सीधे लाखों रुपये के चालान काट रहा है. इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. निजी बस एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष संजय वर्मा और उपाध्यक्ष मुकेश ने बताया कि अधिकतर बस संचालकों ने बैंक से लोन लेकर बसें खरीदी हैं. बस सीज होने पर न तो बैंक की किस्तें चुकाई जा सकती हैं और न ही ड्राइवर व कंडक्टर को समय पर भुगतान हो पाता है.
इसके अलावा इंश्योरेंस, टैक्स और फिटनेस जैसे अनिवार्य खर्च भी लगातार बने रहते हैं. जय अंबे ट्रेवल्स अजमेर के बस संचालक विनोद नक्वाल ने बताया कि उनकी बस तीन महीने पहले आरटीओ से पास हुई थी. इसके बावजूद विभाग ने नई गाइडलाइन का हवाला देकर एक लाख पांच हजार रुपए का चालान काट दिया.
चूरू में भी दिखा हड़ताल का असर
चूरू जिले में भी शनिवार (24 जनवरी) को हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला. सुबह से ही जिलेभर में निजी बसों का संचालन पूरी तरह ठप रहा, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. सरदारशहर से आने-जाने वाली सभी निजी बसें बंद रहने के कारण प्राइवेट बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा रहा. वहीं, यात्रियों का दबाव रोडवेज बस स्टैंड पर अचानक बढ़ गया. रोडवेज बस स्टैंड पर दिनभर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली.
बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा निजी बसों में लगेज कैरियर हटाने और बॉडी कोड को लेकर लागू नियमों से बस संचालकों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इन नियमों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले यात्रियों को भी सामान ले जाने में भारी असुविधा हो रही है.
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