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दोस्त ने 10 लाख रुपये लेकर दी धमकी कहा- 'नहीं दूंगा', कोर्ट के आदेश पर दर्ज FIR

अजमेर के किशनगढ़ में दोस्ती का झांसा देकर 10 लाख रुपये हड़पने का मामला सामने आया है. पुलिस की ढिलाई के बाद कोर्ट के आदेश पर आरोपी मनोज शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की गई.

दोस्त ने 10 लाख रुपये लेकर दी धमकी कहा- 'नहीं दूंगा', कोर्ट के आदेश पर दर्ज FIR
Kishangarh News
NDTV

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में सालों पुरानी दोस्ती और विश्वास का हवाला देकर 10 लाख रुपये उधार लेने तथा बाद में रकम लौटाने से इनकार करने के आरोप के मामले में किशनगढ़ न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 के आदेश पर गांधीनगर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.मामला काली डूंगरी निवासी राजेन्द्र जाट और मदनगंज निवासी मनोज कुमार शर्मा के बीच वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है.

व्यापार बढ़ाने के नाम पर लिए थे 10 लाख रुपये नकद

 परिवादी राजेन्द्र जाट ने वकील जटाशंकर तिवारी के माध्यम से न्यायालय में परिवाद पेश किया था.  इसमें आरोप लगाया गया कि राजेंद्र और आरोपी मनोज कुमार शर्मा के बीच पिछले कई सालों से गहरी दोस्ती थी.इसी अटूट विश्वास का फायदा उठाते हुए आरोपी मनोज ने अपने एयर कंडीशनर (एसी) के बिजनेस को बढ़ाने और एक नई फर्म स्थापित करने का झांसा देकर राजेंद्र से 10 लाख रुपये उधार मांगे थे.

परिवादी के अनुसार दोस्ती का मान रखते हुए उसने 15 जनवरी 2025 को दो गवाहों की मौजूदगी में आरोपी मनोज को 10 लाख रुपये नकद दिए थे. यह रकम उसे 6 महीने के अंदर लौटानी थी. 

नोटिस के बाद भी नहीं लौटाए पैसे

आरोप है कि आरोपी ने लौटाने की अवधि पूरी  के बाद भी भुगतान नहीं किया. जब 6 महीने पूरे हुए , तो राजेंद्र ने अपनी रकम वापस मांगी . इसपर आरोपी पहले टालमटोल करता रहा. काफी दिन बीत जाने के बाद भी जब पैसे नहीं मिले , तो पीड़ित ने अपने वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भी भेजा , लेकिन इसके बावजूद आरोपी पर इसका कोई असर नहीं हुआ. 

परिवाद में संगीन आरोप

पीड़ित का आरोप है कि हद तो तब हो गई जब आरोपी मनोज ने साफ तौर पर पैसे लौटाने से इनकार कर दिया. उसने कथित रूप से पीड़ित को कहा कि उसने शुरू से ही यह रकम हड़पने की नीयत से ली थी और वह इसे वापस नहीं करेगा.

पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

पीड़ित राजेन्द्र जाट ने आरोप लगाया कि उसने इस धोखाधड़ी की शिकायत पहले गांधीनगर थाना पुलिस और फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी की थी, लेकिन लंबे संय तक च्क्कर काटने के बाद जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं तो हारकर  उसने न्यायालय की शरण लेते हुए याचिका दायर कर पुलिस जांच की मांग की.

कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के दिए आदेश

एडवोकेट जटाशंकर तिवारी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करने के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामला गंभीर मानते हुए गांधीनगर थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए. जिसके बाद न्यायालय के आदेश की पालना  करते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया .

मामले की शुरू की जांच

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है. जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान, गवाहों के कथन और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा.

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