Rajasthan News: अजमेर के रामनगर क्षेत्र में ठेला लगाकर कपड़ा प्रेस करने वाले शख्स की उस समय तबीयत बिगड़ गई, जब उसे इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Notice) से 598 करोड़ रुपये के लेनदेन का हिसाब देने के लिए नोटिस मिला. कपड़ा प्रेस करने वाले जितेंद्र बाड़ोलिया को जब से इतने बड़े ट्रांजेक्शन का हिसाब देने के लिए नोटिस के बारे में जानकारी मिली है, तब से उनका शुगर करीब 500 तक पहुंच गया और उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया. जितेंद्र का कहना है कि वह किसी तरह से कपड़े प्रेस करके अपने परिवार का गुजारा करते हैं. इतने बड़े ट्रांजेक्शन से कोई लेना देना नहीं है.
हीरे-जवाहरात से जुड़े ट्रांजेक्शन का नोटिस
जितेंद्र के वकील राकेश ठाडा के मुताबिक, उनके पैनकार्ड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है. जितेंद्र का कहना है कि करीब 2 साल पहले उनका पैन कार्ड खो गया था. जिस पर किसी ने संभवत: किसी ने बैंक खाता खुलवा लिया. उसी आधार पर जीएसटी नंबर जारी करवाकर फर्म भी संचालित की गई. जानकारी के मुताबिक, इनकम टैक्स विभाग के नोटिस में हीरे-जवाहरात के कारोबार से जुड़े ट्रांजेक्शन का जिक्र है. वहीं, जितेंद्र का कहना है कि उनका इस तरह के किसी भी कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है.
जांच में पता कि पाली के एक डायमंड कारोबारी ने जितेन्द्र के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर सूरत (गुजरात) में ‘मैसर्स मनन इंटरप्राइजेज' नाम की कंपनी खोली. इसी फर्म के जरिए महज 3 महीनों के भीतर करीब 600 करोड़ रुपये लेन-देन किया गया. इस मामले को लेकर गंज थाना पुलिस में FIR दर्ज कराई गई है. शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और पुलिस अब उस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है, जिसने दस्तावेज का फर्जी तरीके से इस्तेमाल करके इतने बड़े स्तर पर खेल किया.
लेनदेन पर बैंक मैनेजर को भी इनकम टैक्स का नोटिस
वहीं, आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) ने संबंधित बैंक मैनेजर को भी नोटिस जारी किया है. विभाग का सवाल है कि जब खाते में इतने बड़े स्तर पर ट्रांजेक्शन हो रहे थे, तो नियमानुसार इसकी जानकारी समय पर क्यों नहीं दी गई.
एक मामूली कपड़ा प्रेस की दुकान चलाने वाले के दस्तावेजों पर करोड़ों का ट्रांजेक्शन होना न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि बैंकिंग सिस्टम और केवाईसी (KYC) वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर भी बड़ा सवालिया निशान लगाता है.
यह भी पढ़ें-