Rajasthan News: राजस्थान के अलवर जिले की एक विशेष अदालत (पोक्सो कोर्ट संख्या-1) ने शुक्रवार को 3 महीने की एक मासूम बच्ची के साथ यौन दुर्व्यवहार के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. यह मामला न केवल कानूनी रूप से पेचीदा था, बल्कि सामाजिक संवेदनाओं के लिहाज से भी बेहद गंभीर था.
क्या थी वह घटना?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 30 अप्रैल 2025 की है. अलवर के कठूमर थाना क्षेत्र में एक परिवार के घर के पास निर्माण कार्य चल रहा था. वहां काम करने वाले एक श्रमिक ने घर में घुसकर पालने में सो रही तीन महीने की बच्ची के साथ अमानवीय कृत्य किया. बच्ची के रोने की आवाज सुनकर जब माता-पिता वहां पहुंचे, तो आरोपी उन्हें देखकर मौके से फरार हो गया. इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया.
9 महीने, 18 गवाह, फिर इंसाफ
विशिष्ट लोक अभियोजक विनोद कुमार शर्मा ने NDTV राजस्थान को बताया कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी जैसा संवेदनशील था. अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखने के लिए कुल 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए. 25 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जिनमें मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट शामिल थीं. महज 9 महीने के भीतर चली इस कानूनी प्रक्रिया के बाद, जज ने माना कि आरोपी का कृत्य समाज के प्रति क्रूरतम अपराध है.
मरते दम तक जेल की सजा
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिगों, विशेषकर शिशुओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कानून किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगा. दोषी को 'आजीवन कारावास' की सजा सुनाकर जेल भेज दिया गया है. कानूनी जानकारों का मानना है कि इतनी कम उम्र की बच्ची के मामले में इतनी त्वरित सजा समाज में एक कड़ा संदेश देगी. फिलहाल, पीड़ित परिवार ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है, लेकिन उस मासूम के मन पर लगे घाव भरने में शायद लंबा वक्त लगेगा.
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