Rajasthan News: अगर आप समझते हैं कि हाईटेक ड्रग फैक्ट्रियां और ड्रोन से निगरानी सिर्फ नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज़ में होती हैं, तो आपको चित्तौड़गढ़ पुलिस के 'ऑपरेशन विष हरण' की यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए. कहानी शुरू होती है एक छोटी सी गिरफ्तारी से और खत्म होती है एक ऐसे साम्राज्य पर, जो राजस्थान की शांत वादियों में 'मौत का सामान' तैयार कर रहा था.
8 ग्राम का वो मामूली सुराग
किस्सा शुरू हुआ चित्तौड़गढ़ की कोतवाली से, जहां थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत ने दो लड़कों, सत्तू माली और जीवन वैष्णव को रोका. तलाशी में उसके पास से महज 8 ग्राम एमडी (MD) मिली. आमतौर पर पुलिस इसे छोटी वारदात मानकर फाइल बंद कर देती, लेकिन एसपी मनीष त्रिपाठी के इरादे कुछ और थे. जब पुलिस ने इन लड़कों के मोबाइल का 'पोस्टमॉर्टम' किया, तो कड़ियां जुड़ती गईं और सुई जा अटकी गंगरार के एक सुदूर गांव 'जीवा नायकों का खेड़ा' पर.

MD Drug Factory Chittorgarh, Rajasthan
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ड्रोन से पहरेदारी, पहाड़ियों में छिपकर 'खेल'
पुलिस को सूचना मिली कि गांव के पास पहाड़ियों की ओट में जगदीश बंजारा के मकान में कुछ 'बड़ा' पक रहा है. यहां के माफिया इतने शातिर थे कि उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए ड्रोन तैनात कर रखे थे. जैसे ही कोई अनजान हलचल होती, आसमान में उड़ता उनका 'इलेक्ट्रॉनिक जासूस' उन्हें खबर कर देता.
8 थानों की फोर्स और 100 जवानों ने मारी रेड
लेकिन इस बार पुलिस भी पूरी तैयारी में थी. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरिता सिंह और सीओ गंगरार शिवन्या सिंह के नेतृत्व में 8 थानों की फोर्स और 100 जवानों ने एक साथ मोर्चा संभाला.

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जब आधी रात को गूंजी पुलिस की पदचाप
घेराबंदी ऐसी थी कि परिंदा भी पर न मार सके. हालांकि, अंधेरे और ऊंची पहाड़ियों का फायदा उठाकर मुख्य किरदार— जगदीश, अशोक और राहुल बंजारा भागने में सफल रहे, लेकिन जब पुलिस घर के अंदर दाखिल हुई, तो नजारा किसी लैब जैसा था. चारों तरफ एसिड और रसायनों का जखीरा (एसिटिक एसिड, सोडियम कार्बोनेट)फैला हुआ था. मेजों पर 14 लाख 16 हजार से ज्यादा का कैश बिखरा हुआ था. 33 मोबाइल और 4 लैपटॉप वहां रखे हुए थे, जिनमें तस्करी का पूरा डिजिटल कच्चा चिट्ठा छिपा हुआ था. एक लग्जरी क्रेटा कार और रफ़्तार भरने वाली स्पोर्ट्स बाइक बाहर पार्क थी.

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खतरनाक रसायनों के बीच 'मौत की खेती'
पुलिस ने वहां से मास्क और रेस्पिरेटर सेट भी बरामद किए हैं, जिससे पता चलता है कि यहां कितने बड़े पैमाने पर खतरनाक केमिकल्स से ड्रग्स बनाई जा रही थी. एसपी मनीष त्रिपाठी ने साफ कर दिया है कि यह तो बस 'ट्रेलर' है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है. पुलिस अब उन सफेदपोशों और बड़े शहरों के सप्लायर्स की तलाश में है, जहां यह जहर भेजा जाना था.
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