Didwana DolchiMaar Holi: होली का त्योहार पूरे देश में अलग-अलग अंदाज़ में मनाया जा रहा हैं, लेकिन इन सबके बीच राजस्थान के डीडवाना की होली सबसे अलग मानी जाती है. यहां धुलण्डी के दिन रंग और गुलाल नहीं, बल्कि पानी से भरी लोहे की डोलची से होली खेली जाती है. इस परंपरा को यहां 'डोलची होली' या 'डोलची गैर' कहा जाता है.
उपखंड अधिकारी की पीठ पर पड़ी है पहली डोलची की मार
इस होली की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत उपखंड अधिकारी यानी हाकम की पीठ पर पहली डोलची मारकर की जाती है. इसके बाद फिर पूरा शहर इस अनोखी होली में शामिल हो जाता है. इसी कारण इसे “हाकम की गैर” या “राजकीय गैर” भी कहा जाता है.इस डोलचीमार होली को मनाने के लिए लोग एकत्रित होकर कचहरी परिसर एक्ट्ठा होते हैं.
देखें डोलचीमार होली
डीडवाना की अनोखी डोलची होली
— NDTV Rajasthan (@NDTV_Rajasthan) March 3, 2026
राजस्थान के डीडवाना में होली एक अनोखी परंपरा के साथ मनाई जाती है, जिसे “डोलची होली” कहा जाता है. यहां धुलण्डी के दिन रंग‑गुलाल की जगह पानी से भरी लोहे की डोलची से होली खेली जाती है. इस परंपरा की शुरुआत उपखंड अधिकारी की पीठ पर पहली डोलची मारकर होती है,… pic.twitter.com/YDZnaYQi5F
ब्रिटिश काल से भी पहले की डोलचीमार होली
लोकमान्यताओं के अनुसार यह परंपरा ब्रिटिश काल से भी पहले की है. कहा जाता है कि होली जैसे उल्लासपूर्ण पर्व पर शासन और जनता के बीच सौहार्द और सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से इस अनूठी परंपरा की नींव रखी गई.
कैसे खेली जाती है डोलची होली
इस डोलची होली में बड़े-बड़े कड़ाइयों में सादा पानी भरा जाता है. जिसमें रंग या गुलाल का प्रयोग नहीं किया जाता है. बल्कि लोहे से बनी डोलची में सादा पानी भरकर मारने वाला अपना साथी की पीठ के पीछे खड़े होकर उस पर पूरी ताकत से इसे मारते है. जब डोलची से भरे पानी का प्रहार पड़ता है तो उसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है.जो परंपरा के प्रति आस्था और जोश का प्रतीक है.
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