Unique Holi Of Rajasthan
- सब
- ख़बरें
-
डीडवाना की अनोखी होली, जहां हाकिम की पीठ पर पड़ती है पहली 'डोलची', तब उड़ता है अबीर गुलाल; देखें Video
- Tuesday March 3, 2026
- Written by: जहीर अब्बास उस्मानी, Edited by: अनामिका मिश्रा
राजस्थान के डीडवाना में धुलंडी पर 'डोलची होली' की परंपरा ब्रिटिश काल से पहले निभाई जा रही है. इसमें SDM (हाकिम) की पीठ पर पहली डोलची (लोहे की छोटी सी डोलची) मारकर खेल की शुरुआत होती है. लोहे की डोलची से पानी के प्रहार की यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है.
-
rajasthan.ndtv.in
-
धुलडी के 8 दिन बाद मनाई जाती है राजस्थान में अनोखी होली, जहां जीवित व्यक्ति को अर्थी पर ले जाकर किया जाता है अंतिम संस्कार
- Friday March 21, 2025
- Written by: नवीन जोशी, Edited by: निशांत मिश्रा
यह एक ऐसी परंपरा जिसमें जीवित व्यक्ति को अर्थी पर लेटाया जाता है और गाजे-बाजे के साथ रंग गुलाल उड़ाते हुए उसकी शव यात्रा निकाली जाती है. उसके बाद एक निश्चित स्थान पर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया जाता है.
-
rajasthan.ndtv.in
-
सिरोही: होली के अगले दिन आदिवासी समाज की अनोखी परंपरा, दहन के धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं ग्रामीण
- Saturday March 15, 2025
- Reported by: कोमल यादव, Edited by: सौरभ कुमार मीणा
राजस्थान में सिरोही जिले के जांबूडी गांव में धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर होली मनाने की परंपरा है. इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए. आदिवासी समाज के लोग ढोल नृत्य और गीतों के साथ इस परंपरा का हिस्सा बनते हैं.
-
rajasthan.ndtv.in
-
Holi Special: मिट्टी और गोबर से बनी ढाल से कैसे बढ़ती है उम्र, होली पर राजशाही जमाने से चली आ रही परंपरा
- Thursday March 13, 2025
- Reported by: Sagar Sharma, Edited by: निशांत मिश्रा
Rajasthan: मिट्टी और गोबर से बनी ढाल का इस्तेमाल होली में किया जाता है. यह परंपरा बहुत पुरानी है और मान्यता के अनुसार इससे लोगों की उम्र भी बढ़ती है.
-
rajasthan.ndtv.in
-
Holi 2025: राजस्थान का ऐसा गांव जहां गोला-बारूद से खेली जाती है होली, रात भर चलती हैं तोपें
- Sunday March 2, 2025
- Reported by: IANS, Written by: निशांत मिश्रा
Udaipur Unique Holi Celebration: राजस्थान का एक ऐसा गांव जहां रंग नहीं बल्कि गोलियों की बैछार होती है. रातभर गोला-बारूद के गर्जना के बीच महिलाएं जाकर निडर होकर वीर रस की गीत गाती हैं. यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है.
-
rajasthan.ndtv.in
-
डीडवाना की अनोखी होली, जहां हाकिम की पीठ पर पड़ती है पहली 'डोलची', तब उड़ता है अबीर गुलाल; देखें Video
- Tuesday March 3, 2026
- Written by: जहीर अब्बास उस्मानी, Edited by: अनामिका मिश्रा
राजस्थान के डीडवाना में धुलंडी पर 'डोलची होली' की परंपरा ब्रिटिश काल से पहले निभाई जा रही है. इसमें SDM (हाकिम) की पीठ पर पहली डोलची (लोहे की छोटी सी डोलची) मारकर खेल की शुरुआत होती है. लोहे की डोलची से पानी के प्रहार की यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है.
-
rajasthan.ndtv.in
-
धुलडी के 8 दिन बाद मनाई जाती है राजस्थान में अनोखी होली, जहां जीवित व्यक्ति को अर्थी पर ले जाकर किया जाता है अंतिम संस्कार
- Friday March 21, 2025
- Written by: नवीन जोशी, Edited by: निशांत मिश्रा
यह एक ऐसी परंपरा जिसमें जीवित व्यक्ति को अर्थी पर लेटाया जाता है और गाजे-बाजे के साथ रंग गुलाल उड़ाते हुए उसकी शव यात्रा निकाली जाती है. उसके बाद एक निश्चित स्थान पर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया जाता है.
-
rajasthan.ndtv.in
-
सिरोही: होली के अगले दिन आदिवासी समाज की अनोखी परंपरा, दहन के धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं ग्रामीण
- Saturday March 15, 2025
- Reported by: कोमल यादव, Edited by: सौरभ कुमार मीणा
राजस्थान में सिरोही जिले के जांबूडी गांव में धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर होली मनाने की परंपरा है. इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए. आदिवासी समाज के लोग ढोल नृत्य और गीतों के साथ इस परंपरा का हिस्सा बनते हैं.
-
rajasthan.ndtv.in
-
Holi Special: मिट्टी और गोबर से बनी ढाल से कैसे बढ़ती है उम्र, होली पर राजशाही जमाने से चली आ रही परंपरा
- Thursday March 13, 2025
- Reported by: Sagar Sharma, Edited by: निशांत मिश्रा
Rajasthan: मिट्टी और गोबर से बनी ढाल का इस्तेमाल होली में किया जाता है. यह परंपरा बहुत पुरानी है और मान्यता के अनुसार इससे लोगों की उम्र भी बढ़ती है.
-
rajasthan.ndtv.in
-
Holi 2025: राजस्थान का ऐसा गांव जहां गोला-बारूद से खेली जाती है होली, रात भर चलती हैं तोपें
- Sunday March 2, 2025
- Reported by: IANS, Written by: निशांत मिश्रा
Udaipur Unique Holi Celebration: राजस्थान का एक ऐसा गांव जहां रंग नहीं बल्कि गोलियों की बैछार होती है. रातभर गोला-बारूद के गर्जना के बीच महिलाएं जाकर निडर होकर वीर रस की गीत गाती हैं. यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है.
-
rajasthan.ndtv.in