अब तक आपने सुना होगा कि इंटेलिजेंट व्यक्ति ही डमी कैंडिडेट बनता है लेकिन ये एक अलग ही तरह का इंटेलिजेंट डमी कैंडिडेट है. इस डमी परीक्षार्थी ने खुद आर्ट्स की पढ़ाई करने के बावजूद इंजीनियरिंग की परीक्षा दे दी और परीक्षा पास भी करवा दी. लेकिन, अब राजस्थान पुलिस ने उसे शिकंजे में ले लिया है और AEN 2023 की भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का पर्दाफाश कर दिया है. इस मामले में 25 हज़ार रुपये के इनामी डमी कैंडिडेट समेत कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
आर्ट्स का छात्र बैठा इंजीनियरिंग की परीक्षा में
राजस्थान पुलिस की SOG टीम ने जांच में पाया कि गुरदीप दास ने 10 लाख रुपया लेकर सिविल इंजीनियर की भर्ती परीक्षा दी थी. आरोपी ने साल 2023 में मूल अभ्यर्थी इंद्राज सिंह की जगह इंजीनियरिंग भर्ती परीक्षा दी और परीक्षा पास भी करवा दी. सबसे हैरानी की बात थी कि वह खुद 12वीं तक और वह भी आर्ट्स के विषयों से पढ़ा हुआ था.
एसओजी की जांच के बारे में ADG विशाल बंसल ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी गुरदीप दास के पास किसी प्रकार की कोई इंजीनियरिंग डिग्री नहीं है, तथा वह मात्र 12वीं कक्षा उत्तीर्ण है. इसके बावजूद सहायक अभियंता (सिविल) (स्वायत्त शासन विभाग) प्रतियोगी परीक्षा वर्ष-2022 में उसकी सफलता यह संकेत देती है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक था.

जयपुर में एसओजी मुख्यालय
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ब्लूटूथ से परीक्षा दिलवाई
जांच में पता चला कि गुरदीप ने ब्लूटूथ के माध्यम से परीक्षा दी थी. इसका मतलब साफ था कि गुरदीप को कोई बाहरी गैंग गाइड कर रहा था. अब SOG की टीम उसकी तलाश में जुटी हुई है. इस परीक्षा में की गई धांधली के सिलसिले में मूल अभ्यर्थी इंद्राज सिंह सहित दो अन्य अभियुक्तों परमेश्वर लाल और सलमान खान को गिरफ्तार किया जा चुका है. लेकिन, हिसार (हरियाणा) का रहनेवाला डमी परीक्षार्थी गुरदीप दास फरार चल रहा था. उसके बारे में सूचना देने के लिए एसओजी ने 25,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया हुआ था.
मूल अभ्यर्थी पहले ही गिरफ्तार
आरोपी गुरदीप दास के विरुद्ध कुल 7 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें से 3 प्रकरण हरियाणा राज्य में एवं 4 प्रकरण राजस्थान राज्य में दर्ज हैं. पूर्व में भी अभियुक्त गुरदीप दास के विरुद्ध परीक्षाओं में डमी के रूप में बैठने के बारे में हरियाणा, उदयपुर एवं एसओजी में दर्ज पाए गए हैं.
वहीं प्रकरण में एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि मूल अभ्यर्थी इंद्राज सिंह के पास इलेक्ट्रिकल इंजीनिर्यारंग की डिग्री है. लेकिन, इसके बावजूद उसने सिविल इंजीनियरिंग की पोस्ट के लिए आवेदन किया, तथा पेपर लीक एवं डमी परीक्षार्थी के माध्यम से परीक्षा उत्तीर्ण कर राजकीय सेवा प्राप्त करने का प्रयास किया. इंद्राज ने पूरा सौदा 50 लाख रुपये में तय किया था.
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