मलेरिया रोकने वाली मछलियां और 900 साल पुराने मंदिर, बांसवाड़ा का अरथूना एक अनोखी विरासत

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित अरथूना एक अनोखी ऐतिहासिक धरोहर है. यहां प्राचीन मंदिर, अद्भुत नक्काशी और रहस्यमयी संरचनाएं आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं और इसे खास पर्यटन स्थल बनाती हैं. रिपोर्ट- कौस्तुभ पण्डया

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राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित अरथूना एक अनोखी ऐतिहासिक धरोहर है.

Rajasthan News: राजस्थान के दक्षिणी छोर पर बसे बांसवाड़ा जिले में स्थित अरथूना एक ऐसा स्थल है, जहां पहुंचते ही लगता है जैसे समय थम गया हो. जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान कभी एक समृद्ध और विकसित नगर हुआ करता था. आज यहां बिखरे हुए मंदिरों के अवशेष उस स्वर्णिम दौर की झलक दिखाते हैं जब यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था.

परमार काल की भव्य पहचान

अरथूना का विकास 11वीं और 12वीं शताब्दी में परमार शासकों के समय हुआ. उस दौर में कला, धर्म और वास्तुकला अपने चरम पर थे. यहां आज भी 28 प्राचीन शिवालय मौजूद हैं, जिनमें हनुमानगढ़ी समूह के 24 मंदिर प्रमुख हैं. इसके अलावा 4 अन्य शिव मंदिर, एक जैन मंदिर और एक विशेष मंदिर परिसर भी यहां की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाते हैं.

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बारीक नक्काशी में छिपा इतिहास

अरथूना के मंदिरों की सबसे खास बात उनकी शानदार नक्काशी है. पत्थरों पर उकेरी गई बारीक आकृतियां उस समय की उन्नत शिल्पकला का प्रमाण देती हैं. हर स्तंभ और दीवार एक अलग कहानी बयान करती है. यह स्थान बताता है कि उस युग में आध्यात्मिकता और कला का कितना गहरा संबंध था.

चौंसठ योगिनी मंदिर की अनोखी बनावट

यहां का चौंसठ योगिनी मंदिर अरथूना की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है. देश के ज्यादातर योगिनी मंदिर गोल आकार में बने होते हैं, लेकिन यहां का यह मंदिर आयताकार नागर शैली में निर्मित है. यही विशेषता इसे इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है.

नीलकंठ मंदिर का वैज्ञानिक पहलू

अरथूना का नीलकंठ शिव मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक महत्व भी है. मंदिर के सूर्यकुंड में पाई जाने वाली गंबूशिया मछलियां मच्छरों के लार्वा को खत्म करती हैं, जिससे मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलती है. यह प्रकृति और विज्ञान का अनोखा संतुलन दिखाता है.

पर्यटन की बढ़ती संभावनाएं

मंदिर समिति के सदस्य मुकेश शुक्ला के अनुसार यह स्थल ऐतिहासिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से बेहद अहम है. यहां का शांत वातावरण और प्राचीन संरचनाएं पर्यटकों को खास अनुभव देती हैं. भविष्य में इस क्षेत्र को और बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना बनाई जा रही है.

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