राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर आवास पर मीडिया से बातचीत की. उन्होंने वर्तमान राजनीति और कांग्रेस को लेकर कहा कि वे जिस तरह के हालात देख रहे हैं, वह बहुत चिंताजनक हैं. आने वाला समय बहुत कठिन होने वाला है. देश की लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार सत्ता पक्ष को विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष से संवाद करना चाहिए, ताकि मिलकर देश की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके. दिलचस्प बात है कि गहलोत और सचिन पायलट, मौके-मौके एकजुट होने का दावा करते नजर आए हैं. हाल ही में राहुल गांधी का स्वागत करते वक्त भी किशनगढ़ एयरपोर्ट पर साथ मौजूद थे. लेकिन एक बार फिर गहलोत ने मानेसर एपिसोड पर बयान दिया.
मुझे काम करने का बहुत अवसर मिला- गहलोत
गहलोत ने कहा, "मैंने अपना काम कर दिया है. इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी के कार्यकाल तक, पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है. पार्टी के लिए काम करने का बहुत अवसर मिला है. आज स्थिति चिंता पैदा करने वाली है और आने वाला समय देश के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है."
महाराष्ट्र और एमपी का दिया उदाहरण
गहलोत ने कहा कि चाहे कांग्रेस के नेता हो या युवा, सभी को एक ही बात समझनी चाहिए कि किसी की लकीर को छोटा करने की बजाय अपनी लकीर को बड़ा करना चाहिए तभी पहचान बन पाएगी. जिस तरह से ममता बनर्जी की पार्टी को तोड़ा गया है, वह याद दिलाता है कि भाजपा के शासनकाल में धनबल का खेल जारी है. महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी सत्ता हड़पने के खेल खेला जा चुके है.
पूर्व सीएम बोले- विधायकों को लेने के लिए 2-2 प्लेन भेजे
उन्होंने कहा, "राजस्थान में विधायकों से मिलने के लिए धर्मेंद्र प्रधान आते थे और विधायकों को लेने के लिए दो-दो प्लेन भेजे गए थे, लेकिन जब विधायक नहीं आए तो उन्हें समझ में आया कि राजस्थान में वे सफल नहीं होंगे. हमने उन्हें सफल नहीं होने दिया." उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में 50-50 करोड़ रुपये के ऑफर की खबरें आई थीं और अन्य राज्यों में भी 35-35 करोड़ रुपये के ऑफर की बात सामने आई थी. कुल मिलाकर देश की जनता भाजपा को समझ चुकी है.
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