Ashok Gehlot on Dausa Mob lyching Case: राजस्थान के दौसा जिले में कल यानी गुरुवार को मॉब लिंचिंग की घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बांदीकुई थाना क्षेत्र में बाइक चोरी के आरोप में एक युवक को पेड़ से बांधकर घंटों बांधे बेहरमी तड़पाया, जिसके बादअस्पताल में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई.इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है.
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का तीखा हमला
इस घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. गहलोत ने दौसा के बांदीकुई और अजमेर में युवक को पेड़ से बांधकर पीटने जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर चौतरफा हमला बोला.
अराजकता और जंगलराज का संकेत हैं ऐसी घटनाएं
पूर्व सीएम गहलोत ने कहा कि बांदीकुई में युवक की बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर देना और अजमेर में युवक को पेड़ से बांधकर पीटने जैसी घटनाएं प्रदेश में बढ़ती अराजकता और जंगलराज का संकेत हैं. जब लोग कानून अपने हाथ में लेकर किसी की जान लेने लगें, तब इसे कानून का राज नहीं कहा जा सकता.
अशोक गहलोत का घटना को लेकर किया गया पोस्ट
पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
गहलोत ने मृतक दिनेश मीणा की मां का जिक्र करते हुए भावुक टिप्पणी की और पूछा कि “उस मां पर क्या बीत रही होगी, जिसका बेटा उसकी आंखों के सामने मार दिया गया?” साथ ही उन्होंने घटना के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए. . पूर्व सीएम ने पूछा कि आखिर उस समय पुलिस कहां थी.
गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में फिर से मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो गृह विभाग और पुलिस प्रशासन की विफलता को दर्शाती हैं. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि ऐसी घटनाएं लगातार होती रहीं तो भाजपा सरकार का सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार भी सवालों के घेरे में आ जाएगा.
परिजनों का प्रदर्शन और प्रशासन से समझौता
मृतक की पहचान दिनेश मीणा के रूप में हुई है. दिनेश की मौत की खबर मिलते ही आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. पीड़ित परिवार आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग पर अड़ा हुआ था. शुक्रवार को प्रशासन और पुलिस की लंबी समझाइश के बाद आखिरकार दूसरे दिन गतिरोध समाप्त हुआ.
अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) अरविंद शर्मा ने पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी मदद और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया, जिसके बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए. मेडिकल बोर्ड के जरिए पोस्टमार्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा.
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