फाल्गुन की दूज पर स्वर्ण मुकुट में सजे बाबा रामदेव, दर्शन के लिए लगी 2 KM लंबी कतार; देखें अद्भुत तस्वीरें

फाल्गुन शुक्ल दूज पर बाबा रामदेवरा की समाधि पर स्वर्ण मुकुट सजाया गया है. गुजरात और राजस्थान से पहुंचे हजारों भक्तों की 2 किलोमीटर लंबी कतार लगी है. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, देखें आज की विशेष तस्वीरें.

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आज रामदेवरा में भक्तों की 2 KM लंबी कतार है.
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Rajasthan News: राजस्थान के लोक देवता बाबा रामदेव के दर पर गुरुवार को आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि जिधर नजर घुमाओ, उधर भक्त ही भक्त नजर आ रहे हैं. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की दूज पर बाबा की समाधि के दर्शन के लिए अल्सुबह से ही भक्तों का रेला लगा हुआ है. जय बाबे री और रामसापीर के जयकारों से पूरा वातावरण धर्ममय हो गया है.

स्वर्ण मुकुट के हुए अद्भुत दर्शन

आज का दिन बेहद खास है. दूज के इस पावन मौके पर बाबा की समाधि पर स्वर्ण मुकुट स्थापित किया गया है. इस दिव्य रूप की एक झलक पाने के लिए भक्त बुधवार आधी रात से ही पलकें बिछाए बैठे थे. जैसे ही सुबह मंदिर के द्वार खुले, पूरा परिसर 'खम्मा-खम्मा' और 'जय बाबे री' के जयकारों से गूंज उठा. कतार में लगे श्रद्धालु सुगमतापूर्वक दर्शन कर सकें, इसके लिए मंदिर प्रशासन और पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं.

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गुजरात से आए भक्तों का 'सैलाब'

रामदेवरा की महिमा राजस्थान ही नहीं, पड़ोसी राज्य गुजरात में भी सिर चढ़कर बोलती है. आज दर्शन करने वालों में सबसे ज्यादा तादाद गुजरात के श्रद्धालुओं की है. अहमदाबाद, सूरत, बड़ोदरा, राजकोट और गांधीनगर से हजारों भक्त निजी वाहनों के जरिए पहुंचे हैं. मंदिर के बाहर करीब 2 किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई है, जो श्रद्धा की अटूट डोर को बयां कर रही है.

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चप्पे-चप्पे पर पहरा, प्रशासन अलर्ट

भीड़ इतनी जबरदस्त है कि प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए हैं, लेकिन सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है. पुलिस उप अधीक्षक भवानी सिंह राठौड़ और थानाधिकारी खेताराम खुद मोर्चा संभाले हुए हैं. पोकरण रोड पर वाहनों का जमघट लगा है, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने भारी वाहनों की एंट्री पर 'नो-एंट्री' का बोर्ड लगा दिया है. सरपंच समुंदर सिंह तंवर की टीम पूरे मेला क्षेत्र को चकाचक रखने में जुटी है.

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दर्शन के बाद 'रामसरोवर' का रास्ता

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास प्लान बनाया गया है. सभी भक्तों को कतार में लगकर दर्शन कराए जा रहे हैं और उसके बाद उन्हें सीधे रामसरोवर तालाब की तरफ से बाहर निकाला जा रहा है, ताकि मंदिर परिसर में दबाव न बढ़े.

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