Rajasthan News: राजस्थान के बारां जिले में आदिवासी परिवारों ने अपनी जमीन पर कब्जे का गंभीर आरोप लगाया है. जिले के प्रवास पर आए प्रभारी मंत्री ओटाराम देवासी से पीड़ित परिवारों ने मुलाकात कर 270 बीघा जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की मांग की. उनका कहना है कि सरकार द्वारा आवंटित जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा बना हुआ है.
1986 में मिला था जमीन का पट्टा
मामला किशनगंज तहसील के गरडा गांव का है. पीड़ित परिवारों के अनुसार उन्हें साल 1986 में सरकार ने खेती के लिए जमीन दी थी. उन्होंने 1993 तक इस जमीन पर खेती भी की, लेकिन इसके बाद विक्की उर्फ विक्रम सिंह ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया. तब से लेकर आज तक यह विवाद जारी है.
30 साल से संघर्ष जारी
पीड़ितों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से अपनी जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक कई बार अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. इससे परिवारों में निराशा बढ़ती जा रही है.
विधायक भी आए समर्थन में
इस मामले में क्षेत्रीय विधायक ललित मीणा भी सक्रिय नजर आए. उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बात कर कब्जा हटाने की मांग की है. विधायक का कहना है कि आदिवासी परिवारों को उनका हक मिलना चाहिए.
प्रशासन पर भी उठे सवाल
पीड़ित परिवारों की ओर से कमल बेरवा ने जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना है कि कलेक्टर जमीन का नक्शा नहीं होने की बात कहते हैं, जबकि सभी परिवार एसटी-एससी वर्ग के खातेधारक हैं और उनके पास दस्तावेज मौजूद हैं.
न्याय की उम्मीद में परिवार
लंबे समय से न्याय के इंतजार में बैठे ये परिवार अब भी सरकार और प्रशासन से उम्मीद लगाए हुए हैं. उनका कहना है कि उन्हें विश्वास है कि जल्द ही उनकी 270 बीघा जमीन उन्हें वापस मिलेगी और उन्हें न्याय मिलेगा.
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