Rajasthan News: राजस्थान के बाड़मेर जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-2 ने 13 साल से लंबित एक आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. अदालत ने नागाणा थानाधिकारी अशोक कुमार पर 5 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया है. साथ ही आदेश दिया है कि जब तक आरोपी की गिरफ्तारी या आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी नहीं होती तब तक थानाधिकारी का वेतन रोका जाएगा.
बार-बार वारंट भेजे गए फिर भी नहीं हुई गिरफ्तारी
मामला एक ऐसे आरोपी से जुड़ा है जिसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट कई बार जारी किए गए थे. आरोपी जगदीश उर्फ जगमाल पुत्र तुलछाराम निवासी बाटाडू की जमानत जब्त होने के बाद अदालत ने वारंट जारी किया था. इसके बावजूद पुलिस ने वारंट की तामील को गंभीरता से नहीं लिया. अदालत ने पाया कि कई बार सूचना भेजे जाने के बाद भी आरोपी को पकड़ने के ठोस प्रयास नहीं किए गए. इसी कारण आरोपी लंबे समय तक कानून की गिरफ्त से बाहर रहा और न्याय प्रक्रिया प्रभावित हुई.
हाईकोर्ट के टारगेट केस में शामिल है मामला
यह प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा चिह्नित टारगेट केस की सूची में भी शामिल है. ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है ताकि वर्षों से लंबित मामलों का निस्तारण हो सके. अदालत ने टिप्पणी की कि पुराने मामलों में वारंट निष्पादन में ढिलाई अपराधियों को अनुचित लाभ देती है और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती है.
कार्रवाई पूरी होने तक वेतन कुर्क
न्यायाधीश पीयूष चौधरी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 5 हजार रुपये की राशि थानाधिकारी के वेतन से काटकर अदालत में जमा कराई जाए. साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी या आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी होने तक वेतन कुर्क रहेगा. इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई है और मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है.
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