Rajasthan News: राजस्थान में बाड़मेर जिले के तेल उत्खनन क्षेत्र में भूमिगत ब्लास्ट से एक बार फिर दहशत फैल गई है. पिछले कुछ वर्षों से एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग इन धमाकों से परेशान हैं. किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे ब्लास्ट से उनका जीना मुश्किल हो गया है.
घर, स्कूल और अस्पताल में आई दरारें
हाल ही में तेल उत्खनन का काम कर रही केयर्न वेदांता कंपनी द्वारा किए गए भूमिगत ब्लास्ट के बाद इलाके में तेज कंपन महसूस किया गया. ग्रामीणों का दावा है कि इस कंपन से कई घरों, स्कूलों और सरकारी भवनों में दरारें आ गई हैं. अस्पताल भवन और स्कूल की इमारत जर्जर हो चुकी है. पिछले दो दिनों से बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं जबकि बोर्ड परीक्षाएं भी जारी हैं.
पानी के स्रोत और खेती पर असर
किसानों ने आरोप लगाया कि छितर का पार, जोगासर और काउखेड़ा जैसे गांवों के ट्यूबवेल, जिनसे पूरे जिले में जलदाय विभाग पानी सप्लाई करता था, ब्लास्ट के कारण खराब हो गए हैं. कृषि कुओं में काले रंग का रासायनिक पानी आने लगा है जिससे जमीन बंजर होती जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है.
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी कई बार जांच समितियां गठित की गईं लेकिन उनकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई. नुकसान के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिला. हालिया ब्लास्ट के बाद भी कंपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रही है. ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि मलेशिया में आए भूकंप का असर यहां महसूस हुआ.
सात दिन का अल्टीमेटम
आक्रोशित किसानों ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है. उन्होंने प्रशासन और कंपनी को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है. चेतावनी दी गई है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो तेल उत्पादन बंद करवाकर आंदोलन तेज किया जाएगा.
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