भरतपुर के गांव चहल (बयाना) में श्मशान घाट नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आजादी के 78 साल बाद भी हालात यह है कि गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिजनों को मृत व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार निजी जमीन या नदी में करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा समस्या बारिश के समय होती है, जब उन्हें तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ता है. गांव में पक्का रास्ता भी नहीं है, जिससे शव को लेकर खेतों की मेड से होकर जाना पड़ता है.
अंतिम संस्कार करने गए लोग घायल भी हुए
गांव के रमेश कुमार ने बताया कि 5 जनवरी को उनकी पत्नी प्रेमवती की हृदय गति रूकने से मौत हो गई. उस वक्त पत्नी का अंतिम संस्कार गेहूं की फसल को काटकर खेत में ही अंतिम संस्कार किया गया. उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है गांव की चरागाह भूमि में से श्मशान घाट के लिए जमीन आवंटित की जाए, जिससे लोगों की समस्या का समाधान हो सके.
प्रशासनिक स्तर पर नहीं हो रही सुनवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जिला प्रशासन को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अभी तक समस्या का हल नहीं हुआ. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गांव में श्मशान घाट का निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों को इस समस्या से निजात मिल सके. हालात इस कदर बुरे हैं कि रास्ता ठीक नहीं होने के चलते कई बार लोग फिसलकर घायल हो जाते हैं. उनकी यही मांग है कि यह जो लंबे समय से समस्या बनी हुई है जिला प्रशासन को इसका समाधान करना चाहिए, जिससे लोगों को राहत मिल सके.
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