जैसलमेर में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि भारत की सीमाओं की सुरक्षा केवल सेना और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना राष्ट्रीय हित का विषय है और इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, और सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सरकार ऐसे निर्माणों की पहचान कर उन्हें हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रखेगी.
"अवैध निर्माण की हो रही पहचान"
उन्होंने बताया कि बाड़मेर और जैसलमेर सहित सीमा से जुड़े क्षेत्रों में अवैध रूप से किए गए निर्माणों की पहचान की जा रही है. प्रशासन और संबंधित एजेंसियां ऐसे निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. उन्होंने दो टूक कहा कि जो भी निर्माण नियमों के विपरीत पाए जाएंगे, उन्हें हटाया जाएगा, चाहे वे किसी भी व्यक्ति या वर्ग से जुड़े हों.
"जाति-धर्म को नहीं बनाया जा रहा निशाना"
उन्होंने कहा कि अवैध निर्माणों पर चल रही कार्रवाई को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार किसी जाति, धर्म या समुदाय को निशाना बनाकर काम नहीं कर रही है. कार्रवाई का आधार केवल कानून और वैधता है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग इन कार्रवाइयों को साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार केवल अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ कदम उठा रही है.
"नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने पर सरकार गंंभीर"
सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देश विरोधी गतिविधियों, नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की आवाजाही और घुसपैठ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों को मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके.
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
डॉ. चतुर्वेदी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी राजनीति से जोड़ने का प्रयास करता है. उन्होंने कहा कि सैनिकों के बलिदान और देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में राजनीति नहीं ढूंढनी चाहिए. डॉ. चतुर्वेदी के इस बयान को सीमावर्ती जिलों में चल रही प्रशासनिक कार्रवाई और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार के स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
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