नेशनल सिंबल सेंचुरी एवं उसके आसपास हो रहे अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है. इसे सरकार और प्रशासन की विफलता बताया है. इस मामले में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार को सख्त निर्देश जारी किए गए. शीर्ष अदालत ने नेशनल चंबल सैंक्चुरी और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है. प्रशासनिक विफलता और संरक्षित वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरे के रूप में बताया है.
अधिकारियों के हलफनामों पर भी कोर्ट नाराज
कोर्ट को बताया गया कि रोजाना हजारों ट्रक भारी मशीनरी और रेत ले जा रहे हैं और कई बार चेकपॉइंट से बिना रोक-टोक गुजर रहे हैं. वहीं, राज्य सरकार और NGT ने हलफनामे के माध्यम से कहा कि हमारे पास बंदूकें नहीं हैं और जो माफिया काम कर रहे हैं, उनके पास हमारे मुकाबले बेहतर हथियार है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने प्रशासनिक अधिकारियों की विफलता बताया. सुप्रीम कोर्ट ने इस अवैध खनन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए प्रशासनिक विफलता और पर्यावरण संरक्षण में चुनौती की तरफ ध्यान आकर्षित किया.
चंबल में बड़े स्तर पर अवैध खनन
धौलपुर और मध्य प्रदेश सीमा से गुजर रही चंबल नदी में बड़े स्तर पर खनन किया जा रहा है. खनन माफिया बड़े स्तर पर मध्य प्रदेश सीमा में खनन कर रहे हैं. सैकड़ों की तादात में मशीनरी के माध्यम से माफियाओं द्वारा चंबल का सीना छलनी किया जा रहा है. पुलिस और प्रशासन अवैध खनन पर प्रतिबंध लगाने में नाकाम साबित हो रहा है.
जलीय जीवों के लिए सबसे सुरक्षित चंबल
देश की चंबल नदी सबसे स्वच्छ और साफ सुथरी मानी जाती है. चंबल का पानी और वातावरण जलीय जीवों के लिए अनुकूल माना जाता है. इसी का नतीजा है चंबल में सबसे अधिक घड़ियाल, मगरमच्छ गंग डॉल्फिन, कछुआ आदि जलीय जीव पाए जाते हैं.