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चंबल में बढ़ा घड़ियालों का कुनबा, देवरी केंद्र में 200 अंडों से बाहर आए 91 नन्हें शावक

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के देवरी केंद्र से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. चंबल नदी से जुटाए गए 200 अंडों में से 91 घड़ियाल शावक सुरक्षित बाहर आ गए हैं.

चंबल नदी से जुटाए गए 200 अंडों में से 91 घड़ियाल शावक सुरक्षित बाहर आ गए हैं.

Rajasthan News: जलीय जीवों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए राजस्थान-मध्य प्रदेश की सीमा पर बहने वाली चंबल नदी से एक बेहद सुखद खबर आई है. राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के अंतर्गत आने वाले देवरी घड़ियाल पालन केंद्र में इस साल चंबल नदी से सुरक्षित लाए गए 200 अंडों में से अब तक 91 घड़ियाल शावक सफलतापूर्वक अंडों से बाहर आ चुके हैं. शेष अंडों को भी पूरी तरह अनुकूल वातावरण में रखा गया है और उम्मीद है कि जल्द ही उनसे भी नन्हें शावक बाहर आ जाएंगे. इन नन्हें मेहमानों की चहचहाहट से पूरा पालन केंद्र गूंज रहा है.

'मदर कॉल' सुनते ही शुरू होती है हैचिंग की प्रक्रिया

देवरी घड़ियाल पालन केंद्र की प्रभारी ज्योति डंडोतिया ने बताया कि हर साल चंबल नदी के विभिन्न किनारों (नेस्टिंग साइटों) से लगभग 200 अंडे एकत्र कर केंद्र की विशेष कैप्टिविटी हैचरी में लाए जाते हैं.

इन अंडों को सुरक्षित रखने के लिए चैम्बर में 30 से 35 डिग्री सेल्सियस का नियंत्रित तापमान रखा जाता है. जब अंडों के अंदर से शावक "मदर कॉल" यानी अपनी मां को पुकारने जैसी खास आवाज निकालते हैं तब विशेषज्ञों की देखरेख में हैचिंग (अंडों से बाहर आने) की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है.

तीन साल तक मां की तरह होती है देखभाल

अंडों से निकलने के बाद इन शावकों के स्वास्थ्य भोजन और वजन के हिसाब से उनकी खास देखरेख की जाती है. इन नन्हें घड़ियालों को करीब तीन साल तक केंद्र में ही विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में पाला जाता है. जब ये पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाते हैं और इनकी लंबाई लगभग 1.2 मीटर तक पहुंच जाती है तब इन्हें इनके असली प्राकृतिक आवास यानी चंबल नदी में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ दिया जाता है.

अप्रैल में अंडे और जून में आते हैं शावक

प्रभारी के अनुसार घड़ियालों का प्रजनन काल फरवरी से शुरू होता है. अप्रैल में मादा घड़ियाल नदी किनारे रेतीले हिस्सों में 30 से 40 सेंटीमीटर गहरा गड्ढा खोदकर 18 से 50 तक अंडे देती है. मई-जून के महीने में इन अंडों से बच्चे बाहर आते हैं. चंबल नदी के किनारे ऐसे करीब 30 मुख्य स्थल चिन्हित हैं जहां घड़ियाल सुरक्षित रूप से अंडे देते हैं.

जैव विविधता का गढ़ बनी चंबल नदी

देश की सबसे साफ नदियों में शुमार चंबल नदी आज जलीय जीवों का सबसे सुरक्षित घर बन चुकी है. वर्तमान में इस अभयारण्य क्षेत्र में लगभग 2,456 घड़ियाल, 928 मगरमच्छ और 111 डॉल्फिन शान से निवास कर रहे हैं. 1978 में इस क्षेत्र को अभयारण्य घोषित किया गया था और तब से जारी संरक्षण प्रयासों का ही नतीजा है कि आज चंबल वन्यजीव पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है.

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