मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KP-2 अब रणथंभौर पहुंच गया है. वन विभाग की टीम ने इसे जोन नंबर 9 में देखा है, जहां बाघिन T-127 का भी मूवमेंट है. ऐसे में दोनों के आमने-सामने होने की आशंका जताई जा रही है. रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने बताया कि चीता KP-2 ने 14 फरवरी को राजस्थान में प्रवेश किया था. कूनो से निकलकर चंबल नदी पार कर रणथंभौर की सीमा में चीता दाखिल हुआ था. तब से ही कूनो और रणथंभौर की टीम लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रही है. पिछले तीन-चार दिनों से चीते का मूवमेंट रणथंभौर क्षेत्र में बना हुआ है.
24 घंटे निगरानी कर रहा वन विभाग
वन विभाग की टीम 24 घंटे चीते की निगरानी में तैनात है. डीएफओ मानस सिंह ने कहा कि चीता बाघिन T-127 के क्षेत्र में देखा गया है, लेकिन टाइगर को देखकर चीता पहले से ही सतर्क हो जाता है. अभी तक दोनों के बीच कोई टकराव की सूचना नहीं है.
दोनों का आमना-सामना हुआ तो क्या होगा?
करीब एक सप्ताह पहले मध्यप्रदेश के कूनो से निकलकर चीता रणथंभौर की सीमा में पहुंच गया. वहीं, 16 अप्रैल को पालीघाट रेंज में अजीतपुरा गांव के आसपास चीते का मूवमेंट नजर आया था. ग्रामीणों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी, जिसके बाद से ही विभाग की टीम एक्टिव है. वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, चीता टाईगर को देखकर पहले ही सतर्क हो जाता है. लेकिन अगर चिता का सामना बाघ या बाघिन से हो जाता है तो कुछ भी हो सकता है.
लगातार मॉनिटरिंग कर रही है वन विभाग की टीम
वन्यजीव विशेषज्ञ धर्मेंद्र खांडल ने बताया कि रणथंभौर के जोन नम्बर-9 में बाघिन टी-127 और बाघ टी-108 के अलावा कई सारे लेपर्ड का मूवमेंट भी रहता है. बाघ और बाघिन के साथ ही लेपर्ड भी चीता के लिए किसी खतरे से कम नहीं है. अगर चीता का सामना बाघ- बाघिन या लेपर्ड से हो गया तो फिर चीता का जिंदा बचना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि वनकर्मियों की टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है.
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