मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा में कोचिंग छात्रों के आत्महत्या के मामलों को गंभीरता से लिया है. मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को अपने निवास पर विभिन्न कोचिंग संस्थानों के संचालकों के साथ मीटिंग की. जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया. उन्होंने कमेटी से 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी है. कमेटी रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे ठोस निर्णय लेगी कि आत्महत्या के मामलों की रोकथाम के लिए क्या रुख अपनाना है.
सीएम आवास पर हुई मीटिंग में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला, जाहिदा खान और प्रशासनिक अधिकारी, कोचिंग संस्थानों के संचालक आदि मौजूद रहे. मीटिंग में कोचिंग संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के कारणों और ऐसे मामलों को रोकने के मसले पर मंथन हुआ.
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समस्या केवल राजस्थान की ही नहीं है, बल्कि पूरे देश की समस्या है. मैंने एनसीआरबी के डाटा देखे हैं. 2021 में देशभर में 13 हजार छात्रों ने आत्महत्याएं की हैं. महाराष्ट्र में 1834, एमपी में 1308, तमिलनाडु 1246, कर्नाटक में 855 और उड़ीसा में 834 सुसाइड शामिल हैं.
सीएम ने कहा कि एक बच्चा भी चला जाए तो परेंट्स को कितना दुख होता है, यह कल्पना से बाहर है. इसलिए मैंने जानबूझकर अचानक ही मुख्य सचिव को फोन किया. सीएम ने कोटा में छात्रों की मौतों को लेकर कहा कि 8 महीने में 18 मौत की बात सुन रहे थे, अभी कल या परसों एक मौत और हो गई है.
कोटा में छात्रों के सुसाइड के मसले पर सीएम की मीटिंग
मीटिंग में सीएम गहलोत ने उच्च और तकनीकी शिक्षा सचिव भवानी सिंह देथा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कमेटी के स्टेक होल्डर्स पैरेंट्स भी हों और संस्थाओं के प्रबंधक भी. इस मसले पर जिनकी सुझाव देने की रूचि हो, उन सबको स्टेक होल्डर्स बना दें. सीएम ने कहा कि कमेटी 15 दिन में रिपोर्ट दें. सब मिलाकर जो सुझाव आएं, उस पर कोई ठोस फैसला होना चाहिए। ताकि आगे ऐसी घटनाएं नहीं हो.