राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बीजेपी सरकार पर जुबानी हमला बोला है. उन्होंने कहा कि यह सरकार 'शासन' चलाने के लायक नहीं, बल्कि केवल 'कुशासन और विज्ञापनों' की इवेंट कंपनी बनकर रह गई है. जूली ने केंद्र और राज्य की दोहरी विफलताओं पर वार करते हुए पूछा कि 12 साल से 'आत्मनिर्भरता' का जो खोखला ढोल पीटा जा रहा था, उसका सच जनता के सामने आए. उन्होंने पूछा कि आखिर देश बदहाली और बेरोजगारी के अलावा किस चीज में आत्मनिर्भर हुआ है?
जनता की जेब पर पड़ा डाका- जूली
प्रदेश में गहराते एलपीजी और पेट्रोल संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब पूरा सिस्टम ध्वस्त हो चुका है, तब सरकार 'आग लगने पर कुआं खोदने' का ढोंग कर रही है. राजस्थान में गैस सिलेंडर की सरेआम कालाबाजारी भाजपा के 'भ्रष्टाचार संरक्षण' का जीता-जागता प्रमाण है. साथ ही पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ पर भी तंज कसा और कहा कि राजनीतिक नियुक्तियों में दरकिनार किए गए राठौड़ प्रासंगिकता बचाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं.
गहलोत के 'इंतजारशास्त्र' ने उड़ाई नींद- जूली
जूली ने कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 'इंतज़ारशास्त्र' ने भाजपा के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है. बौखलाहट में भाजपा नेता अब मानसिक संतुलन खोकर भ्रामक और लफ्फाजी भरी बयानबाजी पर उतर आए हैं. बेहतर ये होता कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष यह बताते कि इन प्रोजेक्ट्स को कब तक पूरा कर जनता को समर्पित किया जाएगा."
बीजेपी सरकार को दी सलाह
उन्होंने कहा कि प्रदेश ईंधन की किल्लत और वेंटिलेटर पर खड़ी स्वास्थ्य सेवाओं से कराह रहा है और सरकार अपनी 'कुंभकर्णी नींद' में मदमस्त है. साथ ही सलाह दी कि बेहतर होगा कि सरकार जुमलेबाजी छोड़कर उन जनहित की परियोजनाओं को बहाल करे, जिन्हें इन्होंने द्वेषवश ठंडे बस्ते में डाल दिया है.
पूछा- स्वास्थ्य सेवाओं पर मौन व्रत क्यों?
उन्होंने सवाल पूछा कि नवगठित 8 जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार 'मौन व्रत' क्यों धारण किए हुए है? इन जिलों में मेडिकल कॉलेज की घोषणा न करना भाजपा की प्रशासनिक विफलता और विजन के दिवालिएपन का सबूत है. भाजपा की प्राथमिकता जनता की सेहत नहीं, बल्कि केवल 'पट्टिकाओं पर नाम लिखवाना' है.
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