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गजेंद्र खींवसर से रिश्ते बिगड़े, फिर JDA वाला मामला ले डूबा! RAS बलवंत सिंह लिग्री की विवादों की लंबी फेहरिस्त

जयपुर विकास प्राधिकरण यानी जेडीए के कार्यकाल के दौरान जमीन विवाद सामने आया था. सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन विवाद के चलते ही RAS बलवंत सिंह लिग्री के खिलाफ एक्शन लिया गया है.

गजेंद्र खींवसर से रिश्ते बिगड़े, फिर JDA वाला मामला ले डूबा! RAS बलवंत सिंह लिग्री की विवादों की लंबी फेहरिस्त
आरएएस बलवंत सिंह लिग्री के खिलाफ भजनलाल सरकार का एक्शन.

राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के निलंबित अधिकारी बलवंत सिंह लिग्री अक्सर आरोपों से घिरे रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस बार भ्रष्टाचार के मामले  के चलते उन्हें सस्पेंड किया गया है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. आरएएस बलवंत सिंह लिग्री का विवादों से पुराना नाता रहा है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से भी उनके तल्ख रिश्ते सामने आ चुके हैं.  

मंत्री के लेटर के बाद दफ्तर से हटाए गए

बेवरेज कॉर्पोरेशन में भेजे जाने से ठीक पहले, वह भजनलाल सरकार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के ओएसपी के रूप में तैनात थे. सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, मंत्री खींवसर के साथ उनके संबंध बेहद तल्ख हो गए थे. विवाद इतना बढ़ गया था कि स्वास्थ्य मंत्री ने खुद मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अधिकारी को अपने कार्यालय से तत्काल हटाने की मांग कर दी थी. मंत्री की इस नाराजगी और पत्र के बाद ही उन्हें ओएसडी पद से हटाकर राजस्थान स्टेट बेवरेज कॉर्पोरेशन में कार्यकारी निदेशक की कुर्सी पर बैठाया गया था.

JDA का कार्यकाल बना गले की फांस

2011 कैडर बैच के अधिकारी बलवंत सिंह लिग्री राज्य के कई अहम विभागों में काम कर चुके हैं.  खेतड़ी, सिकराय, तिजारा, आसींद और नीमराणा जैसे महत्वपूर्ण उपखंडों में एसडीएम रहे.  इसके अलावा, उन्होंने जयपुर JDA के कई अलग-अलग जोनों में उपायुक्त की कुर्सी भी संभाली है. जेडीए का यही कार्यकाल अब उनके लिए गले की फांस बन गया है.

जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ सकती है मुश्किल?

सूत्रों के मुताबिक, जेडीए से जुड़े एक पुराने और गंभीर मामले के चलते गाज गिरी है. उनके कार्यकाल में एक विवादित भूमि प्रकरण सामने आया था. फिलहाल, जेडीए भूमि आवंटन और नियमन से जुड़े इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय विभागीय जांच जारी है. 

राज्य सरकार के इस कदम को नौकरशाही में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. सरकार का स्पष्ट रुख है कि जब तक इस मामले की विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक उनका निलंबन जारी रहेगा. जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर ही उनके के खिलाफ आगे की दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी.

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